CAPF कैडर अधिकारियों की अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, गृह मंत्रालय और DoPT से 3 सप्ताह में मांगा शपथ पत्र
नई दिल्ली: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के कैडर अधिकारियों की पदोन्नति और वित्तीय लाभ से जुड़े बहुचर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में अदालत ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के सचिवों को तीन सप्ताह के भीतर शपथ पत्र (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पूछा है कि 23 मई 2025 के ऐतिहासिक फैसले को लागू करने के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं और उसकी विस्तृत प्रगति रिपोर्ट पेश की जाए।
यह मामला महेंद्र सिंह देव बनाम गोविंद मोहन शीर्षक से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। इस पर जस्टिस उज्जल भुइयां और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने सुनवाई की।
दिसंबर 2025 में दायर हुई थी अवमानना याचिका
23 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कैडर अधिकारियों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था और सरकार को छह महीने के भीतर सेवा नियमों एवं भर्ती नियमों की समीक्षा करने का निर्देश दिया था। तय समय में आदेश का पालन नहीं होने पर सेवानिवृत्त कैडर अधिकारियों ने दिसंबर 2025 में केंद्रीय गृह सचिव के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से यह भी पूछा कि 23 मई 2025 के फैसले के बाद अब तक 56 आईपीएस अधिकारियों को वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (SAG) स्तर पर प्रतिनियुक्ति के जरिए केंद्रीय बलों में कैसे नियुक्त किया गया, जबकि अदालत ने प्रतिनियुक्ति को चरणबद्ध तरीके से कम करने का निर्देश दिया था।
सरकार ने मांगा अतिरिक्त समय
कैडर अधिकारियों की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार पहले ही यह स्वीकार कर चुकी है कि CAPF कैडर अधिकारी OGAS (Organised Group ‘A’ Services) के अंतर्गत आते हैं। इसके बावजूद सेवा नियमों की समीक्षा और पदोन्नति से जुड़े निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने इस मामले में शपथ पत्र दाखिल किया है, लेकिन DoPT तथा विभिन्न CAPF के महानिदेशकों (DGs) की ओर से अब तक आवश्यक शपथ पत्र दाखिल नहीं किए गए।
सरकारी पक्ष के वकीलों ने अदालत से अतिरिक्त समय मांगा और कहा कि अब विभिन्न केंद्रीय बलों का आवश्यक डेटा उपलब्ध हो गया है, जिसके आधार पर विस्तृत जवाब दाखिल किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार यह बताए कि 23 मई 2025 के फैसले के बाद अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं और आदेश के अनुपालन की वर्तमान स्थिति क्या है। अदालत ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले विस्तृत शपथ पत्र दाखिल किया जाए।
इस मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
23 मई 2025 के फैसले में क्या था?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में माना था कि केंद्रीय बलों में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के कारण CAPF के कैडर अधिकारियों की पदोन्नति प्रभावित होती है और उन्हें नेतृत्व के अवसर नहीं मिल पाते।
अदालत ने निर्देश दिया था कि:
- CAPF में केवल NFFU (Non-Functional Financial Upgradation) ही नहीं, बल्कि सभी मामलों में OGAS पैटर्न लागू किया जाए।
- सरकार छह महीने के भीतर सेवा एवं भर्ती नियमों की समीक्षा करे।
- SAG स्तर तक आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति अगले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से कम की जाए।
रिव्यू पिटीशन भी हो चुकी है खारिज
कैडर अधिकारियों के वकील ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार द्वारा दायर रिव्यू पिटीशन को भी सुप्रीम कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2025 को खारिज कर दिया था। इसके बावजूद कैडर अधिकारियों को पदोन्नति और वित्तीय लाभ देने की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है।
इसी बीच केंद्र सरकार ने नया CAPF Act भी लागू कर दिया, जिसका कैडर अधिकारियों ने विरोध किया था। उनका कहना है कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पदोन्नति संबंधी सुधार जमीन पर लागू नहीं किए गए।
कैडर अधिकारियों की निगाहें अगली सुनवाई पर
अब सभी की नजरें 2 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यदि सरकार अदालत के निर्देशों के अनुरूप संतोषजनक प्रगति रिपोर्ट पेश नहीं कर पाती है, तो अवमानना याचिका में आगे की कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।

