8वां वेतन आयोग: क्या OPS की होगी वापसी? जानिए OPS, NPS और UPS में क्या है अंतर, क्यों तेज हो रही पुरानी पेंशन की मांग
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा तो कर दी है, लेकिन अभी तक आयोग की औपचारिक अधिसूचना, सदस्यों की नियुक्ति और वेतन-पेंशन संबंधी सिफारिशों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसके बावजूद सरकारी कर्मचारियों के बीच फिटमेंट फैक्टर, महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और न्यूनतम वेतन को लेकर लगातार चर्चाएं और कयास लगाए जा रहे हैं।
इसी बीच पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग भी एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आ रही है। कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग के साथ-साथ ओपीएस को दोबारा लागू करने की मांग उठा रहे हैं। वहीं केंद्र सरकार की ओर से लागू की गई यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) भी चर्चा का विषय बनी हुई है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि OPS, NPS और UPS में क्या अंतर है और कर्मचारी आखिर OPS की मांग क्यों कर रहे हैं।
OPS: सबसे पुरानी पेंशन व्यवस्था
पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme-OPS) भारत की सबसे पुरानी सरकारी पेंशन व्यवस्था मानी जाती है। इसकी शुरुआत वर्ष 1924 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। इस व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों को अंतिम वेतन के आधार पर निश्चित पेंशन दी जाती थी।
हालांकि, 1 जनवरी 2004 से केंद्र सरकार ने नए कर्मचारियों के लिए OPS को बंद कर दिया और इसकी जगह नई पेंशन योजना (NPS) लागू कर दी।
OPS के प्रमुख फायदे
- सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित पेंशन की गारंटी।
- महंगाई भत्ता (DA) बढ़ने पर पेंशन में भी स्वतः वृद्धि।
- कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार को पारिवारिक पेंशन।
- शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं।
- कर्मचारी से किसी प्रकार का मासिक अंशदान नहीं लिया जाता।
क्या है NPS?
नई पेंशन योजना (National Pension System-NPS) को 1 जनवरी 2004 से लागू किया गया था। इसका उद्देश्य सरकार पर भविष्य में बढ़ने वाले पेंशन खर्च को कम करना था। इस योजना में कर्मचारी और सरकार दोनों योगदान करते हैं तथा जमा राशि का निवेश बाजार में किया जाता है।
NPS की प्रमुख विशेषताएं
- निश्चित मासिक पेंशन की गारंटी नहीं।
- कर्मचारी को मूल वेतन और डीए का 10% अंशदान देना होता है।
- सरकार भी निर्धारित अंशदान करती है।
- जमा राशि का निवेश शेयर और बॉन्ड बाजार में किया जाता है।
- निवेश पर आयकर लाभ उपलब्ध।
- सेवानिवृत्ति पर 60% राशि एकमुश्त निकालने पर टैक्स छूट का प्रावधान।
UPS क्या है और कैसे अलग है?
केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू की। यह योजना NPS के तहत आने वाले पात्र केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक विकल्प के रूप में लाई गई है। इसमें OPS की कुछ विशेषताओं को शामिल करने का प्रयास किया गया है।
UPS की प्रमुख विशेषताएं
- पात्र कर्मचारियों को अंतिम वेतन का 50% तक सुनिश्चित पेंशन।
- न्यूनतम ₹10,000 मासिक पेंशन का प्रावधान (निर्धारित पात्रता शर्तों के अधीन)।
- कर्मचारी का 10% और सरकार का 18.5% योगदान।
- महंगाई राहत (DA Relief) के अनुसार पेंशन में वृद्धि।
- कर्मचारी की मृत्यु पर परिवार को 60% पारिवारिक पेंशन।
क्यों तेज हो रही है OPS की मांग?
सरकारी कर्मचारी संगठनों का कहना है कि NPS में मिलने वाली पेंशन पूरी तरह बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करती है, जिससे सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाती। वहीं OPS में निश्चित पेंशन और महंगाई राहत का लाभ मिलता है, इसलिए कर्मचारी इसकी बहाली की मांग कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों की दूसरी प्रमुख मांग न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन लागू करने की भी है। इसी मुद्दे को लेकर ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) ने 6 सितंबर को दिल्ली में एक बड़े महासम्मेलन का आयोजन करने का एलान किया है। संगठन का दावा है कि इसमें देशभर से बड़ी संख्या में कर्मचारी और पेंशनर्स भाग लेंगे तथा सरकार से OPS बहाल करने या न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित करने की मांग करेंगे।
8वें वेतन आयोग से क्या हैं उम्मीदें?
फिलहाल 8वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर, HRA, DA, न्यूनतम वेतन या OPS की बहाली को लेकर केंद्र सरकार ने कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इन सभी मुद्दों पर केवल चर्चाएं और विभिन्न कर्मचारी संगठनों की मांगें सामने आ रही हैं। आयोग की सिफारिशें आने और सरकार के अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा कि कर्मचारियों और पेंशनर्स को क्या लाभ मिलने वाला है।

