सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को फटकार: क्या CAPF में सक्षम अधिकारी नहीं हैं? 23 मई 2025 के फैसले पर क्या किया? सरकार से 2 हफ्ते में माँगा जवाब
नई दिल्ली। CAPF के कैडर अफसरों के ‘संगठित समूह ए सेवा’ (OGAS) मामले में अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को बड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, “यह मानना गलत है कि CAPF में नेतृत्व करने के लिए सक्षम अधिकारी नहीं हैं। CAPF अधिकारी देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, सर्वोच्च बलिदान दे रहे हैं। उनके पास 30 साल का अनुभव है, ऐसे में उन्हें अलग नहीं माना जा सकता। सरकार की तरह न्यायपालिका को भी उनकी चिंता है।”
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन से दो सप्ताह में जवाब मांगा है कि कैडर अफसरों के मामले में सर्विस रूल्स में क्या बदलाव किया गया है, पूरा रोडमैप क्या है और 23 मई 2025 के फैसले को लागू करने के लिए सरकार ने अभी तक क्या किया है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि अब इस मामले की निगरानी वह खुद करेगा।
आईपीएस की संख्या घटने के बजाय बढ़ती गई
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 23 मई 2025 को संजय प्रकाश एवं अन्य बनाम भारत सरकार मामले में ऐतिहासिक फैसला दिया था। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने CAPF के ग्रुप ‘ए’ कार्यकारी संवर्ग को ‘संगठित ग्रुप ए सेवा’ (OGAS) घोषित किया था।
कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि –
- IG स्तर तक IPS की प्रतिनियुक्ति में चरणबद्ध तरीके से कमी लाई जाए।
- CAPF में नियमित कैडर समीक्षा (Cadre Review) की जाए।
- नए सेवा नियम बनाए जाएं।
- नॉन-फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (NFFU) लागू कर पदोन्नति के ठहराव को दूर किया जाए।
कोर्ट ने कहा था कि सभी CAPF – CRPF, BSF, CISF, ITBP, SSB में SAG ग्रेड तक दो साल के भीतर IPS प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम किया जाए, लेकिन उल्टा इन पदों पर IPS की संख्या बढ़ती चली गई।
इसलिए दायर हुई अवमानना याचिका
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तय अवधि में सरकार ने कुछ नहीं किया तो दिसंबर 2025 में रिटायर्ड कैडर अधिकारियों ने गृह सचिव गोविंद मोहन के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने CAPF अधिकारियों की खुलकर तारीफ की। कोर्ट ने पूछा कि SAG तक प्रतिनियुक्ति के पद कम करने के आदेश पर क्या किया गया, कितने पद कम हुए, सेवा नियमों में कोई बदलाव हुआ या नहीं। कोर्ट ने कहा कि फैसले के पालन की मॉनिटरिंग खुद सुप्रीम कोर्ट करेगा और हर कदम की जानकारी सरकार को देनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को तय की गई है।
पिछले दिनों कैडर अफसरों ने CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
56 से ज्यादा IPS प्रतिनियुक्ति पर आए
सुप्रीम कोर्ट का 23 मई 2025 का फैसला NFFU, कैडर रिव्यू और IPS प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के लिए भर्ती नियमों के पुनर्गठन की मांग वाली कई याचिकाओं पर आया था। कोर्ट ने कहा था कि देश की सीमाओं पर सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा में CAPF की भूमिका महत्वपूर्ण है। गृह मंत्रालय को 6 महीने में फैसले का पालन करना था।
इस दौरान केंद्र सरकार रिव्यू पिटीशन में चली गई, जिसे 28 अक्टूबर 2025 को जस्टिस सूर्य कांत (अब चीफ जस्टिस) और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने खारिज कर दिया। फैसले में IPS प्रतिनियुक्ति कम करने को कहा गया था, लेकिन पिछले 6 महीनों में 56 से ज्यादा IPS ने CAPF में प्रतिनियुक्ति पर ज्वाइन किया।
स्वायत्तता प्रभावित होने की आशंका
पूर्व कैडर अफसरों का कहना है कि नए CAPF अधिनियम के जरिए IG और उससे ऊपर के पदों पर IPS प्रतिनियुक्ति को न्यूनतम प्रतिशत के साथ वैधानिक संरक्षण दे दिया गया है। साथ ही सेवा मामलों में गृह मंत्रालय को व्यापक और सर्वोपरि अधिकार दिए गए हैं, जिससे CAPF की स्वायत्तता प्रभावित होने की आशंका है।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू करने के लिए कई बार समय मांगा, लेकिन उसी दौरान ऐसा विधेयक ले आई जिसे कई अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट की भावना और निर्देशों के विपरीत बताया। इस केस में सेवारत अधिकारियों के अलावा पूर्व कैडर अफसर भी वकालतनामे पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।

