बस्तर में सुरक्षा से विकास की ओर बड़ा कदम, नेतानार CRPF कैंप बनेगा पहला जन सुविधा केंद्र। गृहमंत्री अमित शाह करेंगे उद्घाटन
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में पिछले चार दशकों से नक्सल मोर्चे पर तैनात अर्धसैनिक बलों की भूमिका अब नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। नक्सल प्रभाव समाप्त होने के बाद बस्तर से सुरक्षा कैंपों को चरणबद्ध तरीके से जनहित सुविधाओं में बदलने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। इसी क्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आगामी 18 मई को दो दिवसीय बस्तर दौरे पर पहुंचेंगे, जहां नेतानार स्थित सीआरपीएफ कैंप को बस्तर का पहला जन सुविधा केंद्र घोषित कर उसका उद्घाटन करेंगे।
नक्सल गढ़ से विकास मॉडल तक का सफर
नेतानार क्षेत्र कभी नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता था। आसपास के इलाकों में नक्सलियों द्वारा कई बड़ी वारदातों को अंजाम दिया गया था। सुरक्षा बलों द्वारा यहां सीआरपीएफ कैंप स्थापित किए जाने के बाद लगातार अभियान चलाए गए, जिससे क्षेत्र में नक्सली गतिविधियां धीरे-धीरे कम होती चली गईं। अब यह इलाका पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है।
इसी बदलती स्थिति को देखते हुए सरकार ने सुरक्षा ढांचे को विकास ढांचे में बदलने की पहल शुरू की है, जिसके तहत नेतानार कैंप को जन सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
नेतानार बनेगा बस्तर का पहला जन सुविधा केंद्र
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने जानकारी देते हुए बताया कि 31 मार्च 2026 के बाद बस्तर संभाग के अंदरूनी क्षेत्रों में नक्सल गतिविधियां पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। जिन संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के दृष्टिकोण से कैंप स्थापित किए गए थे, उनमें से चयनित कैंपों को अब स्थानीय ग्रामीणों की जरूरतों के अनुसार विकसित किया जाएगा।
योजना के तहत इन कैंपों में डिजिटल सेवा केंद्र, स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग सेंटर तथा फॉरेस्ट फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जाएंगी, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। नेतानार सीआरपीएफ कैंप इस पहल की पहली कड़ी होगा, जिसका उद्घाटन गृहमंत्री अमित शाह के बस्तर प्रवास के दौरान किया जाएगा।
बस्तर में 400 से अधिक सुरक्षा कैंप
अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार बस्तर रेंज के संवेदनशील और दुर्गम क्षेत्रों में लगभग 400 से अधिक सुरक्षा कैंप स्थापित हैं। इन कैंपों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के अंतर्गत सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और जिला पुलिस बल के जवान लंबे समय से तैनात रहे हैं।
अब बस्तर संभाग को पूर्ण रूप से नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद इन सुरक्षा कैंपों को स्थानीय विकास, रोजगार सृजन और जन सुविधाओं के केंद्र के रूप में परिवर्तित करने की योजना बनाई गई है। नेतानार का सीआरपीएफ कैंप इस नई विकास नीति का पहला मॉडल बनने जा रहा है।
सरकार की इस पहल को बस्तर में सुरक्षा से विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां कभी सुरक्षा बलों की मौजूदगी नक्सल विरोधी अभियान का प्रतीक थी, वहीं अब वही परिसर ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता के केंद्र बनेंगे।

