सितंबर में लद्दाख पर रहेगी कड़ी नजर: कानून-व्यवस्था के लिए CRPF की 12 कंपनियां तैनात, सोशल मीडिया और जेन-जी पर खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर
केंद्रीय गृह मंत्रालय और लद्दाख प्रशासन के लिए सितंबर का महीना चुनौतियों से भरा रहने वाला है। लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। पिछले साल 24 सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शन की पहली बरसी को देखते हुए केंद्र ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
लद्दाख में CRPF और RAF की तैनाती
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में CRPF की 12 कंपनियां भेजी गई हैं। गृह मंत्रालय की स्वीकृति के बाद CRPF और उसकी दंगारोधी इकाई RAF (Rapid Action Force) 31 अगस्त से 30 सितंबर तक लद्दाख पुलिस की मदद करेगी।
गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक लद्दाख गृह विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी ने अगस्त के दूसरे सप्ताह में ही केंद्रीय बलों की मांग की थी। तैनाती की वजह साफ तौर पर ‘लॉ एंड ऑर्डर’ बताया गया है।
सितंबर क्यों है अहम?
पिछले साल सितंबर में राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची की मांग को लेकर विशाल प्रदर्शन हुआ था जो हिंसक हो गया था। इस हिंसा में 4 लोगों की मौत हुई थी और दर्जनों घायल हुए थे।
हिंसा के बाद पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर रासुका (NSA) के तहत केस दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया था, जबकि 80 से ज्यादा लोगों पर अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज हुए थे। प्रशासन ने अब तक 25 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है, जबकि बाकी केसों की समीक्षा चल रही है।
इस साल विभिन्न संगठनों ने कई कार्यक्रमों का ऐलान किया है। सबसे बड़ा आयोजन ‘लद्दाख पीस एंड जस्टिस मार्च’ है, जो 10 सितंबर को कारगिल से शुरू होकर 24 सितंबर को लेह में एक विशाल जनसभा के साथ समाप्त होगा।
MHA में होगी अहम बैठक और सोशल मीडिया पर नजर
सितंबर में ही गृह मंत्रालय में लद्दाख को लेकर अहम बैठकें भी प्रस्तावित हैं। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) का कहना है कि पिछले 3 साल में आधा दर्जन बैठकें हो चुकी हैं लेकिन उनकी दो मुख्य मांगों पर कोई ठोस हल नहीं निकला। दोनों संगठन सभी पुराने केस बिना शर्त वापस लेने की मांग पर अड़े हैं।
खुफिया एजेंसियों के लिए अगले 30 दिन सबसे अहम हैं। सोशल मीडिया और जेन-जी इस बार निगरानी के केंद्र में रहेंगे। सोशल मीडिया पर किस तरह के मैसेज सर्कुलेट हो रहे हैं, कहीं सीमा पार से तो समर्थन नहीं मिल रहा, इस पर लोकल पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय एजेंसियों की भी पैनी नजर रहेगी।
शांतिपूर्ण आयोजन सुनिश्चित करने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस को भी लद्दाख में तैनात किया गया है।

