CGHS में बड़ी राहत: गंभीर बीमारी से पीड़ित आश्रित बेटे और भाइयों के इलाज के लिए उम्र और वैवाहिक स्थिति की शर्तों में छूट
नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026: केंद्र सरकार ने केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (CGHS) और CS(MA) Rules, 1944 के तहत गंभीर या टर्मिनल बीमारी से जूझ रहे आश्रित बेटों और भाइयों के लिए बड़ी राहत का फैसला लिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ऐसे मामलों में उम्र और वैवाहिक स्थिति से जुड़ी शर्तों में महत्वपूर्ण छूट देने का आदेश जारी किया है।
मंत्रालय के नए आदेश के अनुसार, क्रिटिकल या टर्मिनल बीमारी से पीड़ित आश्रित बेटे और भाई को निर्धारित शर्तें पूरी करने और सक्षम मेडिकल बोर्ड की मंजूरी के आधार पर जीवनभर CGHS/मेडिकल अटेंडेंस की सुविधा दी जा सकेगी।
किन बीमारियों में मिल सकता है लाभ?
आदेश में बताया गया है कि यह राहत ऐसी पुरानी, गंभीर, क्रिटिकल या टर्मिनल बीमारियों के मामलों में लागू होगी, जिनसे व्यक्ति की कार्यक्षमता लंबे समय तक प्रभावित होती है या उसके लिए आजीविका कमाना अथवा आत्मनिर्भर होना मुश्किल हो जाता है।
इनमें गंभीर कैंसर, गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियां, लंबे समय तक इलाज या सपोर्ट की जरूरत वाली अंतिम अवस्था की अंग संबंधी बीमारियां, गंभीर जन्मजात या आनुवंशिक बीमारियां तथा इसी स्तर की अन्य गंभीर मल्टी-सिस्टम बीमारियां शामिल हो सकती हैं।
हर मामले का होगा मेडिकल बोर्ड से आकलन
इस सुविधा का लाभ स्वतः नहीं मिलेगा। पात्रता का फैसला केस-टू-केस आधार पर किया जाएगा। बीमारी की गंभीरता, दैनिक जीवन में कार्यक्षमता पर असर, कमाई करने की क्षमता और लगातार निर्भरता जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। जटिल मामलों में संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर भी मरीज की स्थिति और कार्यक्षमता का आकलन करेंगे।
CGHS लाभार्थियों के मामलों में Additional Director/CGHS Regional Headquarters स्तर पर गठित Decentralised Medical Boards पात्रता का आकलन और सिफारिश करेंगे। इनके फैसले के खिलाफ अपील या संदर्भ के लिए CGHS मुख्यालय पर Appellate Medical Board की व्यवस्था भी की गई है।
वहीं, CS(MA) Rules, 1944 के अंतर्गत आने वाले लाभार्थियों की पात्रता का आकलन और सिफारिश DGHS द्वारा की जाएगी।
शादी होने पर भी सुविधा बंद नहीं होगी
नए प्रावधान की सबसे अहम बात यह है कि पात्र आश्रित बेटे या भाई की शादी होने मात्र से CGHS/मेडिकल अटेंडेंस की सुविधा बंद नहीं होगी, बशर्ते निर्धारित dependency conditions लगातार पूरी होती रहें और सक्षम मेडिकल बोर्ड/प्राधिकरण कवरेज जारी रखने की सिफारिश करे।
हालांकि, इस छूट से परिवार की परिभाषा का विस्तार नहीं होगा। यानी यह लाभ केवल पात्र आश्रित बेटे या भाई तक सीमित रहेगा और उसकी पत्नी या बच्चों को इसका लाभ नहीं मिलेगा।
मौजूदा नियम क्या थे?
मौजूदा CGHS दिशानिर्देशों के तहत सामान्यतः अविवाहित आश्रित बेटा 25 वर्ष की आयु तक CGHS सुविधा का पात्र होता है, जबकि स्थायी रूप से दिव्यांग अविवाहित बेटे को निर्धारित शर्तों के अधीन जीवनभर सुविधा मिल सकती है। आश्रित भाई के लिए सामान्य आयु सीमा 18 वर्ष थी, जबकि दिव्यांग आश्रित भाई को बिना आयु सीमा के कवर किया जा सकता था।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नए निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।

