ITBP सब-इंस्पेक्टर 14 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’, फर्जी NIA-सुप्रीम कोर्ट के पत्र दिखाकर ₹7.50 लाख की ठगी
पंचकूला: हरियाणा के पंचकूला जिले में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। रामगढ़ स्थित ITBP (इंडो-तिब्बत सीमा पुलिस) फैमिली कॉम्प्लेक्स में तैनात सब-इंस्पेक्टर (टेलीकम्युनिकेशन) मदन सिंह (58) को कथित साइबर ठगों ने करीब 14 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराकर ₹7.50 लाख की ठगी का शिकार बना लिया।
आरोप है कि ठगों ने खुद को शिमला पुलिस, ATS पुणे और अन्य जांच एजेंसियों से जुड़ा अधिकारी बताया। पीड़ित को विश्वास में लेने और डराने के लिए कथित तौर पर NIA, सुप्रीम कोर्ट और RBI के नाम से फर्जी दस्तावेज और पत्र भी भेजे गए।
आधार से जारी सिम अपराध में इस्तेमाल होने का डर दिखाया
मामले की शुरुआत पीड़ित के मोबाइल पर आए एक कॉल से हुई। कॉल करने वाले ने खुद को शिमला पुलिस से जुड़ा बताते हुए दावा किया कि मदन सिंह के आधार कार्ड पर जारी एक सिम कार्ड किसी आपराधिक गतिविधि में इस्तेमाल हुआ है।
जब मदन सिंह ने बताया कि वह ITBP में तैनात हैं, तो ठगों ने कथित तौर पर मामले को ATS मुख्यालय पुणे ट्रांसफर करने का नाटक किया।
इसके बाद खुद को ATS पुणे का सीनियर इंस्पेक्टर बताने वाले एक व्यक्ति ने पुलिस जैसी वर्दी पहनकर WhatsApp पर वीडियो कॉल की। आरोप है कि उसने मदन सिंह को बताया कि उनके आधार से जुड़ा सिम जम्मू-कश्मीर में एक उग्रवादी के पास मिला है और उनके ऊपर पैसों के लेनदेन का भी शक है।
उन्हें पुणे आकर गिरफ्तारी देने की बात कहकर डराया गया।
हर दो घंटे में ऑनलाइन रिपोर्टिंग का दबाव
पीड़ित ने ड्यूटी का हवाला देते हुए पुणे आने में असमर्थता जताई तो ठगों ने कथित तौर पर NIA के नाम से एक फर्जी पत्र भेजा और दावा किया कि उनकी जांच ऑनलाइन करने की अनुमति मिल गई है।
इसके बाद मदन सिंह को हर दो घंटे में वीडियो या इंटरनेट के माध्यम से अपनी मौजूदगी और लोकेशन बताने के लिए कहा गया। आरोप है कि जब भी इंटरनेट बंद होता, ठग तुरंत फोन करके इंटरनेट चालू करवाते थे।
इस तरह उन्हें लगातार निगरानी और गिरफ्तारी का डर दिखाकर करीब 14 दिनों तक दबाव में रखा गया।
सुप्रीम कोर्ट का फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाया
मामले में 7 अक्टूबर को नया मोड़ आया। ठगों ने कथित तौर पर भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट के नाम से फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजकर पीड़ित पर दबाव और बढ़ा दिया।
इसके बाद RBI के नाम से कथित फर्जी पत्र भेजे गए और कहा गया कि जांच के लिए उन्हें अपने सभी Investments को तोड़कर रकम बैंक खाते में जमा करनी होगी। ठगों ने इसे वित्तीय सत्यापन की प्रक्रिया बताकर भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा।
दो दिनों में ट्रांसफर कराए ₹7.50 लाख
आरोप है कि 11 अक्टूबर को पीड़ित से Yes Bank के एक खाते में दो-दो लाख रुपये के दो चेक के जरिए कुल ₹4 लाख ट्रांसफर कराए गए।
इसके अगले दिन यानी 12 अक्टूबर को Bank of India के खाते में ₹3 लाख और UPI के जरिए ₹50 हजार ट्रांसफर करवाए गए।
इस तरह पीड़ित से कुल ₹7.50 लाख की रकम ट्रांसफर करा ली गई।
खाते में ₹45 हजार बचे तो हुआ ठगी का अहसास
ठगों ने मदन सिंह को भरोसा दिलाया था कि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के 12 घंटे के भीतर उन्हें NOC जारी कर दी जाएगी और जमा कराई गई रकम वापस मिल जाएगी।
लेकिन पैसा वापस नहीं आया। इस बीच उनके SBI खाते में करीब ₹45 हजार ही शेष रह गए। इसके बाद उन्हें शक हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।
पीड़ित ने इसके बाद पंचकूला साइबर थाना पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।
साइबर पुलिस ने दर्ज किया मामला
पंचकूला सेक्टर-20 साइबर थाना इंचार्ज युद्धवीर के अनुसार शिकायत के आधार पर BNS की धारा 316(2), 318(4), 319, 336(3), 338, 340(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
जिन खातों में रकम ट्रांसफर होने की बात सामने आई है, उनमें कथित तौर पर ‘Water Facility Management’ और ‘New Modern Artificial Jewellery’ नाम से जुड़े खाते शामिल हैं। पुलिस इन खातों को फ्रीज कराने की प्रक्रिया में जुटी है और मामले की आगे जांच की जा रही है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर बढ़ रहे साइबर फ्रॉड
इस मामले में इस्तेमाल किया गया तरीका साइबर ठगी के उस पैटर्न से मिलता है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI, NIA, ED या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित को गंभीर अपराध में फंसने और गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं।
इसके बाद वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी का माहौल बनाकर पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं। किसी भी सरकारी जांच एजेंसी द्वारा वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को इस तरह पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहना सामान्य कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है।
नोट: मामले में ठगी और फर्जी दस्तावेजों से संबंधित आरोप पुलिस शिकायत और दर्ज केस पर आधारित हैं। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

