फार्म हाउस के नाम पर CRPF के दो जवानों से 40 लाख की ठगी, एग्रीमेंट के बाद आरोपी गायब
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में CRPF के दो जवानों के साथ फार्म हाउस दिलाने के नाम पर कथित तौर पर 40 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने दूसरे की जमीन को अपनी बताकर जवानों को फार्म हाउस के प्लॉट दिखाए और एग्रीमेंट कर दोनों से 20-20 लाख रुपये ले लिए। रजिस्ट्री का समय आने पर आरोपी कथित तौर पर गायब हो गया।
मामले में मिसरोद पुलिस ने CRPF जवान की शिकायत की जांच के बाद आरोपी राजेंद्र सिंह परमार के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
साथी जवान के जरिए हुई थी पहचान
पुलिस के मुताबिक, बृजेंद्र तिवारी CRPF में पदस्थ हैं और कौशल नगर में रहते हैं। वर्ष 2025 में एक साथी जवान के माध्यम से उनकी मुलाकात राजेंद्र सिंह परमार नामक व्यक्ति से हुई थी।
आरोप है कि राजेंद्र ने दोनों जवानों को सीहोर के ग्राम कोढ़ी में पांच-पांच हजार वर्गफीट के प्लॉट दिखाए। उसने दावा किया कि जमीन उसकी अपनी है और यहां फार्म हाउस लिया जा सकता है।
पहले साथी जवान ने दिए 20 लाख रुपये
बताया गया है कि बृजेंद्र तिवारी के साथी जवान को प्लॉट पसंद आया और उसने आरोपी के साथ एग्रीमेंट कर 20 लाख रुपये का भुगतान कर दिया।
इसके बाद बृजेंद्र तिवारी को भी फार्म हाउस पसंद आया। उन्होंने भी राजेंद्र सिंह परमार के साथ एग्रीमेंट किया और अलग-अलग किश्तों में कुल 20 लाख रुपये उसके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए।
इस तरह दोनों जवानों से कुल करीब 40 लाख रुपये लिए जाने का आरोप है।
रजिस्ट्री का समय आया तो आरोपी गायब
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब जमीन की रजिस्ट्री कराने की बारी आई। आरोप है कि इसके बाद राजेंद्र सिंह परमार संपर्क से बाहर हो गया। जवानों को बाद में कथित तौर पर पता चला कि जिस जमीन को आरोपी अपनी बताकर सौदा कर रहा था, वह उसकी नहीं थी।
इसके बाद बृजेंद्र तिवारी ने मिसरोद पुलिस से शिकायत की। शिकायत की जांच के बाद पुलिस ने राजेंद्र सिंह परमार के खिलाफ ठगी का मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
बताया गया है कि बृजेंद्र तिवारी के साथी जवान ने भी इससे पहले इसी आरोपी के खिलाफ खजूरी सड़क थाने में FIR दर्ज कराई थी।
जमीन खरीदने वालों के लिए भी सबक
यह मामला जमीन या फार्म हाउस खरीदने से पहले मालिकाना हक और दस्तावेजों की स्वतंत्र रूप से जांच कराने की जरूरत को भी रेखांकित करता है। किसी भी बड़ी रकम का भुगतान करने से पहले जमीन की रजिस्ट्री, खसरा-खतौनी, मालिक का नाम और संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराना जरूरी है।
नोट: आरोपी पर लगाए गए आरोप पुलिस शिकायत और दर्ज मामले पर आधारित हैं। अंतिम रूप से दोष सिद्ध होना न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

