27 साल बाद CRPF जवान को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने Disability Pension और बकाया देने का दिया आदेश
कटक। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक पूर्व जवान की करीब 27 साल पुरानी Disability Pension की लड़ाई में बड़ी राहत मिली है। ओडिशा हाईकोर्ट ने जवान की Disability Pension का दावा खारिज करने वाले वर्ष 2011 के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को Disability Pension मंजूर करने और बकाया राशि जारी करने का निर्देश दिया गया है।
मामला Sashi Kanta Panda बनाम Director General of CRPF & Others का है। इसका केस नंबर W.P.(C) No. 24304 of 2014 है। मामले की सुनवाई Justice Biraja Prasanna Satapathy की अदालत में हुई।
1999 में Medical Invalidation पर हुए थे रिटायर
मामले की शुरुआत वर्ष 1999 से होती है। CRPF जवान Sashi Kanta Panda को स्वास्थ्य संबंधी कारणों से आगे की सेवा के लिए अक्षम पाया गया था।
उन्हें Schizophrenia की समस्या थी। Medical Board ने उन्हें आगे की सेवा के लिए पूरी तरह और स्थायी रूप से अक्षम माना था।
इसके बाद CRPF ने 1 सितंबर 1999 को medical invalidation के आधार पर उनकी retirement की अनुमति दी।
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि CRPF के उस समय के आदेश में जवान को Medical Board की recommendation के आधार पर 50 प्रतिशत Disability Pension का हकदार बताया गया था।
यानी जिस समय उन्हें medical ground पर service से invalidated किया गया, उस समय जारी आदेश में Disability Pension की entitlement दर्ज थी।
बाद में Pension का दावा हुआ खारिज
इसके बावजूद जवान को Disability Pension का लाभ नहीं मिला।
बाद में वर्ष 2011 में उनका दावा खारिज कर दिया गया।
अधिकारियों की तरफ से कहा गया कि Schizophrenia संबंधित नियमों के तहत Extraordinary Disability Pension के लिए classified disease नहीं है। इसके अलावा उनकी qualifying service 10 वर्ष पूरी नहीं होने का आधार भी लिया गया।
उन्हें बताया गया कि वे केवल service gratuity के हकदार हैं, जिसका भुगतान किया जा चुका है।
इसके बाद जवान ने Disability Pension के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की और मामला ओडिशा हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट ने CRPF के पुराने आदेश को माना महत्वपूर्ण
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह था कि जब CRPF ने खुद वर्ष 1999 के invalidation order में जवान को 50 प्रतिशत Disability Pension का हकदार बताया था, तो बाद में उसी लाभ से उन्हें कैसे वंचित किया जा सकता है?
अदालत ने पाया कि वर्ष 1999 का वह मूल आदेश कभी वापस नहीं लिया गया और न ही उसमें ऐसा संशोधन किया गया जिससे Disability Pension की entitlement समाप्त हो जाती।
ऐसी स्थिति में बाद में यह कहकर दावा खारिज करना कि Schizophrenia classified disease नहीं है, अदालत को स्वीकार्य नहीं लगा।
2011 का आदेश रद्द
ओडिशा हाईकोर्ट ने Disability Pension का दावा खारिज करने वाले 2011 के आदेश को रद्द कर दिया।
अदालत ने संबंधित अधिकारियों को जवान की Disability Pension मंजूर करने और उसका बकाया जारी करने का निर्देश दिया।
इस तरह 1999 में medical invalidation के बाद शुरू हुआ Disability Pension का विवाद करीब 27 साल बाद जवान के पक्ष में महत्वपूर्ण राहत के साथ समाप्त हुआ।
दूसरे CRPF और CAPF जवानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?
यह फैसला medical invalidation और Disability Pension से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भ बन सकता है।
विशेष रूप से ऐसे मामलों में, जहां विभाग के मूल retirement या invalidation order में किसी जवान की Disability Pension entitlement स्पष्ट रूप से दर्ज हो और बाद में प्रशासनिक स्तर पर उसी benefit को किसी दूसरे आधार पर रोक दिया गया हो, यह फैसला महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर medical invalidation या Disability Pension case में अपने-आप pension मिल जाएगी।
प्रत्येक मामले में उस समय लागू नियम, Medical Board की findings, disability की परिस्थितियां, service record और विभाग द्वारा जारी किए गए मूल आदेश को देखना जरूरी होगा।
लेकिन Sashi Kanta Panda के मामले में ओडिशा हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से CRPF के 1999 के अपने आदेश को महत्वपूर्ण माना, जिसमें 50 प्रतिशत Disability Pension की entitlement दर्ज थी।
करीब 27 साल बाद आए इस फैसले से पूर्व CRPF जवान को न केवल Disability Pension का रास्ता साफ हुआ है, बल्कि अदालत ने संबंधित बकाया राशि जारी करने का भी निर्देश दिया है।
NEWS OF PARAMILITARY

