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दिल्ली हाईकोर्ट:31 जनवरी 2019 तक 60 वर्ष पार कर चुके CAPF रिटायर्ड कर्मियों को नहीं मिलेगा बढ़ी सेवानिवृत्ति आयु का लाभ

नई दिल्ली:
दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के सेवानिवृत्त कर्मियों द्वारा दायर याचिकाओं के एक समूह को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि 31 जनवरी 2019 तक 60 वर्ष की आयु पार कर चुके कर्मी बढ़ाई गई सेवानिवृत्ति आयु से उत्पन्न पेंशन संबंधी लाभों के हकदार नहीं होंगे।

न्यायमूर्ति अनिल क्षत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के वे पूर्व कर्मी थे, जो वर्ष 2011 से 2016 के बीच सेवानिवृत्त हुए थे।

क्या थी याचिका

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि उन्हें Dev Sharma v. ITBP मामले में दिए गए फैसले का लाभ दिया जाए। इस ऐतिहासिक निर्णय में CAPFs में अलग-अलग सेवानिवृत्ति आयु (कमांडेंट तक 57 वर्ष और उससे ऊपर 60 वर्ष) को असंवैधानिक घोषित करते हुए सभी रैंकों के लिए सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष निर्धारित की गई थी।

हालांकि अदालत ने उस समय स्पष्ट किया था कि सेवानिवृत्त कर्मियों को पुनः सेवा में नहीं लिया जाएगा और न ही वेतन बकाया मिलेगा, लेकिन पेंशन पुनर्गणना के लिए सैद्धांतिक (Notional) सेवा विस्तार पर विचार किया जा सकता है।

केंद्र सरकार का फैसला

बाद में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने CAPFs में 60 वर्ष की समान सेवानिवृत्ति आयु लागू कर दी। इसके बाद कई पूर्व कर्मियों ने दावा किया कि उन्हें भी समान पेंशन लाभ मिलना चाहिए।

हाईकोर्ट का निर्णय

अदालत ने अपने पूर्व फैसलों — Bharat Singh v. Union of India और Rajender Singh v. Union of India — का हवाला देते हुए कहा कि Dev Sharma फैसले का लाभ केवल सीमित श्रेणी के कर्मियों तक ही लागू होगा।

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि:

  • Notional सेवा विस्तार और पेंशन संशोधन का लाभ केवल उन कर्मियों को मिलेगा, जिन्होंने 31 जनवरी 2019 तक 60 वर्ष की आयु पार नहीं की थी।
  • जो कर्मी उस तारीख तक 60 वर्ष से अधिक आयु के हो चुके थे, वे इस राहत के दायरे में नहीं आते।

नो वर्क, नो पे” सिद्धांत लागू

अदालत ने “नो वर्क, नो पे” सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि जो कर्मचारी संबंधित अवधि में सेवा में नहीं रहे, वे उस अवधि के वित्तीय या सेवा लाभ का दावा नहीं कर सकते।

कोर्ट ने कहा कि केवल सेवानिवृत्ति आयु बढ़ जाने से पूर्व में रिटायर हो चुके कर्मियों को स्वतः पिछली अवधि के आर्थिक लाभ नहीं मिल सकते।

अंतिम टिप्पणी

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कई वर्षों पहले सेवा से अलग हो चुके कर्मियों को अब काल्पनिक रूप से सेवा जारी मानकर लाभ देना सेवा कानून के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत होगा।

यह फैसला “Charanjit Lal and Ors v. Union of India and Ors” मामले में सुनाया गया।

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