New Digital Fraud: फोन अपने आप हुआ रीसेट, CISF जवान के खाते से उड़ गए 95 हजार रुपये
मुंबई। साइबर ठगी के मामलों में लगातार नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में मुंबई में तैनात एक CISF जवान के साथ हुई डिजिटल धोखाधड़ी की घटना ने सभी को चौंका दिया है। इस मामले में न तो कोई फर्जी लिंक भेजा गया और न ही पीड़ित से ओटीपी साझा कराया गया, फिर भी उनके बैंक खाते से करीब 96 हजार रुपये निकाल लिए गए।
मिली जानकारी के अनुसार, 34 वर्षीय CISF कॉन्स्टेबल का स्मार्टफोन अचानक अपने आप रीसेट (फॉर्मेट) हो गया। फोन दोबारा चालू करने पर उसमें मौजूद सभी ऐप्स गायब हो चुके थे। इसके बाद जवान ने सामान्य प्रक्रिया के तहत अपने मोबाइल को फिर से सेट किया और आवश्यक ऐप्स, जिनमें बैंकिंग और पेमेंट ऐप्स भी शामिल थे, दोबारा इंस्टॉल कर लिए।
जब उन्होंने अपने खाते का बैलेंस चेक किया तो उनके होश उड़ गए। खाते से कुल 95,668 रुपये निकाले जा चुके थे। पीड़ित को इस लेनदेन की कोई जानकारी नहीं थी और न ही उन्होंने किसी को बैंकिंग संबंधी जानकारी साझा की थी।
धोखाधड़ी का पता चलते ही CISF जवान ने तत्काल बैंक से संपर्क कर अपना खाता ब्लॉक कराया। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी।
जांच के दौरान पता चला कि रकम जिस खाते में ट्रांसफर की गई, वह एक ऐसे मोबाइल नंबर से जुड़ा था जिसके बारे में पीड़ित को कोई जानकारी नहीं थी। फिलहाल पुलिस उस मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी जुटाने में लगी हुई है।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला किसी मैलवेयर, रिमोट एक्सेस टूल या अन्य तकनीकी छेड़छाड़ से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि फोन का अपने आप फॉर्मेट होना तकनीकी खराबी थी या किसी साइबर हमले का हिस्सा।
पुलिस फोन के रीसेट होने और बैंक खाते से रकम निकलने के बीच संभावित संबंध की जांच कर रही है। इस घटना ने मोबाइल सुरक्षा और डिजिटल बैंकिंग को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
ऐसे रखें खुद को सुरक्षित
- मोबाइल में केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही ऐप डाउनलोड करें।
- फोन में इंस्टॉल ऐप्स और उनकी परमिशन की नियमित जांच करें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अनजान ऐप को तुरंत हटाएं।
- बैंक खाते में संदिग्ध लेनदेन दिखने पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
- मोबाइल और बैंकिंग ऐप्स को हमेशा अपडेट रखें।
यह मामला दर्शाता है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में डिजिटल सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।

