NEWS OF PARAMILITARY (CAPF)

देशभक्ति और सूचना का सशक्त मंच

NEWS OF PARAMILITARY (CAPF)

देशभक्ति और सूचना का सशक्त मंच

CISF NEWS

CISF जवान की अनिवार्य सेवानिवृत्ति बरकरार, कलकत्ता हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की

कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवान अमरेश कुमार की अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने विभागीय कार्रवाई, पुराने दंडों को अलग आरोप के रूप में शामिल किए जाने और बाद में दी गई सजा से संबंधित आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया।

यह मामला Amaresh Kumar vs Union of India & Ors. से संबंधित है, जिस पर हाईकोर्ट ने 15 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया।

1994 में CISF में भर्ती हुए थे अमरेश कुमार

अदालत के अनुसार, अमरेश कुमार को 4 जुलाई 1994 को CISF में नियुक्त किया गया था। सेवा के दौरान उन्हें कई rewards भी मिले, लेकिन उनके खिलाफ अनुशासनहीनता और misconduct से जुड़े 12 पूर्व दंड भी दर्ज थे।

वर्तमान विभागीय कार्रवाई में इन पुराने दंडों को केवल पिछले रिकॉर्ड के रूप में देखने के बजाय चार्जशीट में अलग Charge-II के रूप में शामिल किया गया था। कर्मचारी की ओर से इस पर आपत्ति जताते हुए Article 20(2) से जुड़े तर्क भी दिए गए।

पुराने 12 दंडों को लेकर क्या कहा हाईकोर्ट ने?

हाईकोर्ट ने Article 20(2) की दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि पुराने दंडों को दोबारा उसी अपराध के लिए सजा देने के उद्देश्य से नहीं लाया गया था, बल्कि उन्हें चार्जशीट में अलग आरोप के रूप में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया था।

इस कारण कर्मचारी को उन आरोपों की जानकारी थी और उन्हें चुनौती देने तथा अपना पक्ष रखने का अवसर भी मिला था।

सर्विस राइफल से जुड़ा आरोप भी बना अहम बिंदु

मामले में कर्मचारी के conduct को गंभीर मानने का एक कारण यह भी था कि विवाद के दौरान service rifle उठाने से संबंधित आरोप सामने आया था। अदालत ने CISF जैसे disciplined force में इस प्रकार के conduct को गंभीरता से लिया।

अदालत ने यह भी माना कि विभागीय जांच में कर्मचारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों के निष्कर्ष उपलब्ध evidence के आधार पर थे और उन्हें मनमाना या perverse नहीं कहा जा सकता।

अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार

हाईकोर्ट ने वर्तमान misconduct और पहले के दंडात्मक रिकॉर्ड को देखते हुए अधिकारियों द्वारा लगाई गई Compulsory Retirement की सजा में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

अदालत ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मूल आदेश के साथ-साथ उसके खिलाफ दायर appeal और revision में पारित आदेशों को भी बरकरार रखा।

इसके बाद अदालत ने कर्मचारी की writ petition खारिज कर दी। संबंधित connected applications भी dispose कर दिए गए और पहले दिया गया interim order vacate कर दिया गया। फैसले पर चार सप्ताह की stay मांग को भी अदालत ने स्वीकार नहीं किया।

हाईकोर्ट के फैसले का मुख्य बिंदु

इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि किसी कर्मचारी के पुराने misconduct या punishments को चार्जशीट में स्पष्ट रूप से अलग आरोप के रूप में शामिल किया गया हो और कर्मचारी को उन पर जवाब देने का अवसर मिला हो, तो विभागीय कार्रवाई में उन मामलों पर विचार किए जाने को केवल “पुरानी सजा को दोबारा इस्तेमाल करना” नहीं माना जाएगा।

मामला: Amaresh Kumar vs Union of India & Ors.
कोर्ट: कलकत्ता हाईकोर्ट
फैसला: 15 सितंबर 2026
संबंधित बल: CISF
मुख्य मुद्दा: Departmental proceedings और Compulsory Retirement

Spread the love

Editorial Desk – News of Paramilitary

Editorial Desk, News of Paramilitary, covers verified news, policy updates and field reports related to India’s Paramilitary Forces. Content is published following strict editorial standards.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page