गुवाहाटी हाईकोर्ट : नशे में 27 राउंड फायरिंग केस में SSB जवान की बर्खास्तगी रद्द,50% बैक वेजेस के साथ सेवा में बहाली का आदेश
सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवान द्वारा संतरी ड्यूटी पर 27 राउंड फायरिंग करने के मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस राजेश मजूमदार की सिंगल बेंच ने जवान की बर्खास्तगी को गैरकानूनी ठहराते हुए रद्द कर दिया और तत्काल बहाली का आदेश दिया।
क्या था मामला? WP(C)/5948/2018
याचिकाकर्ता महाले मनोज जनार्दन महाराष्ट्र के अकोला जिले के रहने वाले हैं। वह 4 दिसंबर 2013 को SSB में Constable (GD) के पद पर भर्ती हुए थे और घटना के समय 15वीं बटालियन, काजलगांव, असम में तैनात थे।
आरोप है कि 16 अक्टूबर 2017 की रात करीब 11 बजे BOP धौला में संतरी ड्यूटी के दौरान मनोज ने अपनी सर्विस INSAS राइफल (No. 16949079) से 27 राउंड फायर कर दिए और खुद के बाएं हाथ की हथेली में गोली लगने से घायल हो गए।
घटना के बाद 18 अक्टूबर 2017 को DIG, SHQ, बोंगाईगांव ने Court of Inquiry का आदेश दिया और जवान को उसी दिन से सस्पेंड कर दिया। COI रिपोर्ट 2 नवंबर 2017 को आई, जिसके आधार पर कमांडेंट ने Record of Evidence (ROE) तैयार कराया और फिर 6 फरवरी से 23 फरवरी 2018 तक Summary Force Court (SFC) में ट्रायल चलाया।
SFC ने 4 आरोप लगाए थे:
- धारा 18(c) – संतरी ड्यूटी पर नशे की हालत में पाया जाना
- धारा 27(c) – जानबूझकर खुद को चोट पहुंचाना
- धारा 33(e) – 27 राउंड सरकारी गोला-बारूद बर्बाद कर सरकारी संपत्ति को नुकसान
- धारा 43 – अच्छी व्यवस्था और अनुशासन का उल्लंघन
23 फरवरी 2018 को SFC ने जवान को सभी आरोपों में दोषी मानते हुए “सेवा से बर्खास्त” (Dismissed from Service) की सजा सुनाई। 16 जुलाई 2018 को IG, Frontier HQ, गुवाहाटी ने अपील भी खारिज कर दी।
जवान ने हाईकोर्ट में क्या कहा?
वकील ने दलील दी कि SFC की प्रक्रिया नियमों के खिलाफ थी। कमांडेंट ने खुद ही कोर्ट का Presiding Officer बनकर खुद को ही दुभाषिया (Interpreter) भी नियुक्त कर लिया। फायरिंग होते किसी गवाह ने नहीं देखा। नशे का आरोप सिर्फ मुंह से शराब की बदबू आने के आधार पर लगाया गया, जबकि घटना के तुरंत बाद 17 अक्टूबर 2017 को हुआ ब्लड टेस्ट निगेटिव आया था और उसमें अल्कोहल “Nil” था। वह रिपोर्ट विभाग ने जानबूझकर छिपा दी। जवान का कहना था कि जंगल की तरफ से फायरिंग हुई थी, जिसके जवाब में उसने फायर किया, यह सिर्फ जजमेंट की भूल हो सकती है, अनुशासनहीनता नहीं।
SSB ने क्या कहा?
SSB ने कहा कि सभी प्रक्रिया का पालन हुआ, जवान को Friend of Accused दिया गया। किसी गवाह ने नहीं देखा कि जंगल से कोई फायर हुआ। सभी गवाहों ने कहा कि मुंह से तेज शराब की बदबू आ रही थी।
हाईकोर्ट का फैसला – बर्खास्तगी आदेश बिना दिमाग लगाए लिखा गया
कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि 23 फरवरी 2018 का बर्खास्तगी आदेश पूरी तरह से बिना कारण बताए (Non-speaking Order) है।
कोर्ट ने कहा, अभियोजन 16 फरवरी 2018 को बंद हुआ, बचाव पक्ष का बयान भी उसी दिन लिया गया और उसी दिन दोषी करार दे दिया गया। Verdict में सिर्फ लिखा है – “I am of the opinion on the evidence before me that accused is Guilty” – लेकिन किस सबूत पर दोषी माना, इसका कोई विश्लेषण ही नहीं है।
साथ ही पहला और तीसरा आरोप जिसमें जवान ने दबाव में गुनाह कबूल किया था, वह भी ठीक से रिकॉर्ड नहीं किया गया। ब्लड टेस्ट में अल्कोहल Nil होने की रिपोर्ट पर न तो SFC ने और न ही अपीलीय प्राधिकारी ने विचार किया।
यह प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन है। अनुशासनिक प्राधिकारी जो खुद ही जांचकर्ता और सजा देने वाला दोनों है, उसे कारण बताना ही होगा।
अंतिम आदेश:
- SFC का 16 फरवरी 2018 का Verdict और 23 फरवरी 2018 का बर्खास्तगी आदेश तथा 16 जुलाई 2018 का अपीलीय आदेश रद्द और निरस्त किए जाते हैं।
- याचिकाकर्ता को तुरंत सेवा में बहाल किया जाए।
- बर्खास्तगी से बहाली तक की अवधि को सेवा की निरंतरता में गिना जाएगा और 50% बेसिक पे बैक वेजेज के रूप में दिया जाएगा।
- कोर्ट ने SSB को छूट दी है कि वह चाहे तो नए सिरे से 6 महीने के अंदर नियमानुसार जांच शुरू कर सकता है।

