NEWS OF PARAMILITARY (CAPF)

देशभक्ति और सूचना का सशक्त मंच

NEWS OF PARAMILITARY (CAPF)

देशभक्ति और सूचना का सशक्त मंच

CISF NEWSCAPF कोर्ट केस अपडेट्स

पानी-पूरी खिलाने के इशारे पर गई CISF जवान की नौकरी, हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी को सही ठहराया

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने CISF कांस्टेबल को नौकरी से हटाने के फैसले को बरकरार रखा है। जस्टिस वी. सुजाता की बेंच ने 8 साल पुरानी याचिका Writ Petition No. 10930/2018 को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वर्दीधारी बल के जवान से ड्यूटी के बाहर भी ऊंचे आचरण की उम्मीद की जाती है।

क्या था मामला?
याचिकाकर्ता ऋषि कपूर पुत्र गुरुदेव राज, पंजाब के गुरदासपुर के रहने वाले हैं। वह 4 अप्रैल 2012 को CISF में Constable/GD के पद पर भर्ती हुए थे और विशाखापट्टनम स्टील प्लांट में तैनात थे।

घटना 14 नवंबर 2013 की है। शाम करीब 7 बजे जनरल शिफ्ट ड्यूटी खत्म करके ऋषि कपूर सेक्टर-2, VSP टाउनशिप, उक्कुनगरम की सब्जी मंडी गए। वहां एक ठेले पर पानी-पूरी खा रहे थे। आरोप है कि उसी समय वहां मौजूद तीन लड़कियों में से एक की तरफ हाथ और सिर से इशारा करके पानी-पूरी खाने के लिए बुलाया।

याचिकाकर्ता का कहना है कि इसके बाद लड़कियों के दोस्तों ने उन्हें पकड़कर पीटा, वह भागकर पास में ड्यूटी कर रहे होमगार्ड के पास गए। होमगार्ड ने CISF कंट्रोल रूम को सूचना दी और रात 9:40 बजे उन्हें यूनिट लाइंस वापस लाया गया।

विभागीय कार्रवाई और बर्खास्तगी
20 नवंबर 2013 को CISF Rules, 2001 के Rule 36 के तहत चार्ज मेमो जारी किया गया – (1) बिना अनुमति बाजार जाना, (2) अंजान लड़की से छेड़छाड़। ऋषि ने 2 दिसंबर 2013 को जवाब में आरोपों से इनकार किया।

विभागीय जांच में जांच अधिकारी ने आरोप साबित माना। 22 जनवरी 2014 को सीनियर कमांडेंट (Disciplinary Authority) ने सेवा से हटाने (Removal from Service) की बड़ी सजा दी। अपील 30 अप्रैल 2014 को खारिज हो गई।

इसके बाद ऋषि ने गुरदासपुर सिविल कोर्ट में सिविल सूट 349/2014 दायर किया जो 30 जनवरी 2017 को क्षेत्राधिकार न होने से खारिज हो गया। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भी विशाखापट्टनम के उचित फोरम में जाने को कहा। फिर 3 साल बाद 23 अक्टूबर 2017 को रिवीजन दायर की, जो 22 फरवरी 2018 को IG, CISF ने खारिज कर दी।

हाईकोर्ट में क्या दलील दी गई?
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि जिस लड़की के साथ छेड़छाड़ का आरोप है, उसे जांच में पेश ही नहीं किया गया, सजा जरूरत से ज्यादा कठोर है। सुप्रीम कोर्ट के Ranjit Thakur Vs Union of India (1987) फैसले का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि सजा प्रतिशोधी या अत्यधिक कठोर नहीं होनी चाहिए।

CISF की ओर से कहा गया कि लड़की का पेश न होना जांच को खारिज नहीं करता। घटना के समय मौजूद विभागीय गवाहों, होमगार्ड कर्मियों की गवाही और खुद ऋषि कपूर का 14 नवंबर 2013 का प्रारंभिक बयान जिसमें उसने इशारा करने की बात कबूल की थी, सबूत के लिए काफी है।

हाईकोर्ट का फैसला
कोर्ट ने माना कि जांच निर्धारित प्रक्रिया से हुई, याचिकाकर्ता को गवाहों से जिरह का पूरा मौका मिला, प्राकृतिक न्याय का पालन हुआ।

कोर्ट ने कहा –

“याचिकाकर्ता एक अनुशासित बल का सदस्य है और उससे न केवल ड्यूटी के दौरान बल्कि समाज में बाहर भी उच्च स्तर के अनुशासन, शालीनता और मर्यादा की अपेक्षा की जाती है। सरकारी सेवक, खासकर वर्दीधारी बल का जवान, सार्वजनिक स्थान पर संयम और गरिमा से पेश आए। इस मामले में याचिकाकर्ता सार्वजनिक स्थान पर आचरण का मानक बनाए रखने में विफल रहा।”

लड़की की गैर-परीक्षण पर कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर पूरी विभागीय कार्यवाही दूषित नहीं हो जाती, जब परिस्थितिजन्य गवाह और होमगार्ड कर्मियों की गवाही से आरोप साबित हो रहा है।

इन सभी आधारों पर कोर्ट ने रिट याचिका को खारिज कर दिया और बर्खास्तगी के आदेश को सही ठहराया।

Spread the love

Editorial Desk – News of Paramilitary

Editorial Desk, News of Paramilitary, covers verified news, policy updates and field reports related to India’s Paramilitary Forces. Content is published following strict editorial standards.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page