CAPF ऑफिसर कैडर रिव्यू और OGAS मामला: अवमानना याचिका पर सुनवाई से पहले गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा, मांगा अतिरिक्त समय
नई दिल्ली: केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) में कैडर अधिकारियों के हितों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के 23 मई 2025 के आदेश के अनुपालन में देरी को लेकर अवमानना याचिका दायर की गई है। इस मामले की सुनवाई 27 अप्रैल को प्रस्तावित है। सुनवाई से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर अतिरिक्त समय की मांग की है।
गृह मंत्रालय की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि कैडर रिव्यू की प्रक्रिया जारी है, लेकिन यह अत्यंत जटिल और बहुआयामी प्रक्रिया है, जिसमें कई मंत्रालयों और विभागों का समन्वय आवश्यक है। मंत्रालय ने अदालत को भरोसा दिलाया कि आदेश की अवहेलना जानबूझकर नहीं की गई है।
गृह मंत्रालय ने क्या कहा
केंद्रीय गृह मंत्रालय में अवर सचिव अमित कुमार द्वारा 24 अप्रैल को दायर हलफनामे में बताया गया कि कैडर समीक्षा में सेवा नियमों में संशोधन, प्रशासनिक समन्वय, वित्तीय प्रभावों का मूल्यांकन और विभिन्न संस्थाओं से परामर्श शामिल है। इस प्रक्रिया में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) तथा वित्त मंत्रालय सहित कई विभागों की भागीदारी आवश्यक होने के कारण इसे तत्काल पूरा करना संभव नहीं है।
मंत्रालय ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि प्रक्रिया को सही तरीके से पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय प्रदान किया जाए।
अब तक की कार्रवाई
गृह मंत्रालय ने 26 दिसंबर को सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को पत्र भेजकर एक महीने के भीतर विस्तृत कैडर समीक्षा प्रस्ताव मांगे थे। प्रस्ताव लंबित रहने पर 3 फरवरी को अनुस्मारक भी भेजा गया। मंत्रालय ने अदालत को बताया कि मामला सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के कारण उच्च प्राथमिकता पर रखा गया है।
इस बीच संसद ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में ग्रुप-ए अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों को विनियमित करने हेतु केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 भी पारित किया है।
गृह मंत्रालय के अनुसार कैडर रिव्यू में नीतिगत, वित्तीय और संरचनात्मक बदलाव शामिल हैं, जिनका दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। विभिन्न मंत्रालयों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श आवश्यक होने के कारण प्रक्रिया में समय लग रहा है। इसी आधार पर मंत्रालय ने विविध आवेदन संख्या 14121/2026 दाखिल कर अदालत से देरी के कारणों पर विचार करने का अनुरोध किया है।
इस मामले में याचिकाकर्ता महेंद्र सिंह देव एवं अन्य हैं, जबकि प्रतिवादी के रूप में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन सहित अन्य अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पृष्ठभूमि
सर्वोच्च न्यायालय ने सिविल अपील संख्या 13104/2024 में 23 मई 2025 को ऐतिहासिक आदेश देते हुए 2021 से लंबित सभी सीएपीएफ कैडर समीक्षा छह महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि गृह मंत्रालय प्रत्येक बल के सेवा एवं भर्ती नियमों की समीक्षा करे और कैडर अधिकारियों की राय को शामिल किया जाए।
इसके अलावा पदोन्नति में ठहराव कम करने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड स्तर तक प्रतिनियुक्ति पदों को दो वर्षों के भीतर चरणबद्ध तरीके से घटाने का निर्देश दिया गया था। तय समय सीमा में आदेश लागू न होने पर पूर्व कैडर अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की।
अब 27 अप्रैल की सुनवाई में यह तय होगा कि अदालत गृह मंत्रालय को अतिरिक्त समय देती है या आदेश के पालन को लेकर कड़ा रुख अपनाती है।

