गुवाहाटी हाईकोर्ट ने BSF जवान की याचिका खारिज की, डिग्री कट-ऑफ डेट के बाद मिलने से SSC SI भर्ती से बाहर
गौहाटी हाईकोर्ट ने SSC सब-इंस्पेक्टर भर्ती 2024 से जुड़े एक अहम मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने BSF में तैनात कांस्टेबल (GD) गौरव की रिट याचिका WP(C)/4947/2026 को खारिज कर दिया है।
क्या था मामला?
याचिकाकर्ता गौरव, जो वर्तमान में BSF में Constable (GD) के पद पर तैनात हैं और मूल रूप से कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, उन्होंने SSC द्वारा 4 मार्च 2024 को जारी नोटिस के आधार पर दिल्ली पुलिस और CAPF में सब-इंस्पेक्टर पद के लिए आवेदन किया था।
याचिकाकर्ता का कहना था कि उन्होंने BSF से NOC लेकर B.A. तीसरे वर्ष की परीक्षा सत्र 2023-24 में दी थी और उनका अंतिम पेपर 20 जून 2024 को खत्म हो गया था, जो कि नोटिस में तय कट-ऑफ डेट 01.08.2024 से पहले था। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने रिजल्ट 14 अगस्त 2024 को घोषित किया, यानी कट-ऑफ से 14 दिन बाद।
गौरव ने Paper-1 और Paper-2 दोनों पास कर लिए थे और 20 सितंबर 2025 को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल के लिए बुलाया गया था, लेकिन वहां उनकी उम्मीदवारी इस आधार पर खारिज कर दी गई कि उनकी बैचलर डिग्री कट-ऑफ डेट के बाद की है।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि परीक्षा तो कट-ऑफ से पहले हो गई थी, रिजल्ट में देरी यूनिवर्सिटी की वजह से हुई, इसलिए 14 दिन की देरी को माफ किया जाना चाहिए।
सरकार और SSC का पक्ष
केंद्र सरकार और SSC की ओर से पेश CGC ने कहा कि यह स्थापित कानून है कि भर्ती नोटिस में जो कट-ऑफ डेट दी गई है, उस दिन तक योग्यता पूरी होना अनिवार्य है। नोटिस के क्लॉज 7 में साफ लिखा था – “Educational qualification as on 01.08.2024″।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के Himachal Pradesh State Electricity Board Ltd. Vs. Dharminder Singh (Civil Appeal No. 8828/2022) के फैसले का हवाला भी दिया, जिसमें कहा गया है कि विज्ञापित योग्यता प्राप्त करने की अंतिम तिथि ही कट-ऑफ होती है।
हाईकोर्ट का फैसला
जस्टिस अंजन मोनी कलिता की बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता के पास 01.08.2024 तक बैचलर डिग्री नहीं थी। उन्होंने डिग्री 14.08.2024 को प्राप्त की, जो कट-ऑफ के बाद है।
कोर्ट ने कहा –
“इस मामले में याचिकाकर्ता ने आवश्यक बैचलर डिग्री केवल 14.08.2024 को प्राप्त की, जो कट-ऑफ डेट के बाद है। इसलिए याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी को खारिज करने में अधिकारियों की कार्रवाई में कोई खामी नहीं है।”
इसी आधार पर कोर्ट ने याचिका में कोई मेरिट न पाते हुए उसे खारिज कर दिया।

