CAPFs में IPS डेपुटेशन पर गृह सचिव ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा: कहा- कोर्ट ने पूरी रोक नहीं लगाई
नई दिल्ली: पांच अर्धसैनिक बलों में 40 से ज्यादा IPS अधिकारियों की डेपुटेशन को लेकर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश इन नियुक्तियों पर पूरी तरह रोक नहीं लगाता है। उन्होंने कहा कि ये नियुक्तियां पहले से तय व्यवस्था और नियमों के तहत की गई हैं।
सोमवार को गृह सचिव ने जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच के निर्देश पर हलफनामा दाखिल किया। यह सुनवाई CAPFs में IPS अधिकारियों की डेपुटेशन को कानूनी रूप देने वाला कानून लाने के सरकार के कदम के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर हुई। यह याचिका अर्धसैनिक बलों के कई मौजूदा और रिटायर्ड कैडर अधिकारियों ने दायर की थी।
46 अधिकारियों की डेपुटेशन पर मांगा था स्पष्टीकरण
पिछली सुनवाई में गृह सचिव ने बताया था कि 23 मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से 46 अधिकारियों को CAPFs में डेपुटेशन पर लाया गया है। इस पर कोर्ट ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा था।
गृह सचिव ने अपने हलफनामे में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दो साल के भीतर डेपुटेशन पर काम कर रहे IPS अधिकारियों की संख्या धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया था। केंद्र ने इस आदेश पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में खारिज कर दिया था। इसके बावजूद इस साल सरकार ने विरोध के बीच CAPF (General Administration) Act लागू कर दिया।
हलफनामे में मोहन ने कहा, “यह सम्मानपूर्वक बताया जाता है कि माननीय कोर्ट ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया है कि अलग-अलग CAPFs में IPS अधिकारियों की डेपुटेशन को पूरी तरह बंद कर दिया जाए। माननीय कोर्ट का निर्देश डेपुटेशन के लिए तय पदों की संख्या को धीरे-धीरे कम करने का है और यह CAPFs में डेपुटेशन पर IPS अधिकारियों की नियुक्ति पर रोक नहीं है।”
प्रमुखों की मांग पर की गई नियुक्तियां
गृह सचिव ने कहा कि ये डेपुटेशन केवल केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रमुखों की मांग के आधार पर की गई थीं। इनमें CRPF, CISF, BSF, SSB और ITBP शामिल हैं।
उन्होंने कोर्ट को बताया, “यह भी बताया जाता है कि ऊपर बताई गई डेपुटेशन ऐसी नियुक्तियों से जुड़े लागू वैधानिक और नियामक नियमों के अनुसार की गई हैं। 23.05.2025 के फैसले के बाद नियुक्तियां संबंधित भर्ती नियमों के तहत तय कोटे में खाली पदों के लिए संबंधित महानिदेशक के माध्यम से अलग-अलग CAPFs से मिली मांग के आधार पर की गई हैं।”
NFU और कैडर रिव्यू पर क्या कहा?
गृह सचिव ने बताया कि केंद्र ने विभिन्न CAPFs में अधिकारियों के करियर में रुकावट को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार गैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन (Non-Functional Financial Upgradation) का लाभ दिया है।
कैडर में बदलाव के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सभी CAPFs ने कैडर की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू कर दी है और अपने प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेज दिए हैं। फील्ड यूनिट के प्रतिनिधियों और अधिकारियों को भी अपने सुझाव देने का मौका दिया गया है ताकि कैडर रिव्यू हर पहलू और ऑपरेशनल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा सके।
साथ ही गृह सचिव ने कोर्ट के सभी दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए और समय देने की मांग दोहराई।

