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CAPF Group-A अधिकारियों के कैडर रिव्यू पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 30 नवंबर तक प्रस्ताव देने का निर्देश

नई दिल्ली: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के Group-A cadre officers से जुड़े कैडर रिव्यू मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के अनुपालन पर सवाल उठाए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि मई 2025 में दिए गए उसके निर्देशों के अनुसार कैडर समीक्षा तय समय-सीमा में पूरी नहीं हुई।

न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कैडर रिव्यू कमेटी को निर्देश दिया कि वह 30 नवंबर 2026 तक संबंधित प्रस्ताव मंजूरी के लिए प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को तय की गई है।

किन CAPF अधिकारियों से जुड़ा है मामला?

यह मामला मुख्य रूप से इन पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के Group-A cadre officers से संबंधित है:

  • सीमा सुरक्षा बल (BSF)
  • केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF)
  • केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF)
  • भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP)
  • सशस्त्र सीमा बल (SSB)

मामले का प्रमुख मुद्दा इन बलों में Group-A अधिकारियों के cadre review, promotion opportunities, career progression और senior-level posts पर cadre officers की हिस्सेदारी से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा—मई 2025 के आदेश का वास्तविक पालन हुआ या नहीं?

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि पांचों बलों के कैडर रिव्यू प्रस्ताव संबंधित समिति के समक्ष विचाराधीन हैं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि यह देखना चाहता है कि 23 मई 2025 के फैसले का वास्तविक रूप से कितना पालन हुआ है।

मई 2025 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने CAPF के Group-A cadre structure और promotion stagnation से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे।

IPS deputation का भी मांगा पूरा डेटा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से BSF, CRPF, CISF, ITBP और SSB में IPS अधिकारियों की deputation से संबंधित विस्तृत आंकड़े भी मांगे हैं।

अदालत ने कहा है कि केंद्र यह बताए कि:

23 मई 2025 को Senior Administrative Grade (SAG) स्तर तक कितने IPS अधिकारी deputation पर तैनात थे और वर्तमान में उनकी संख्या कितनी है।

इस तुलना के जरिए अदालत यह जांचना चाहती है कि उसके पिछले निर्देशों के बाद IPS deputation में वास्तव में कमी आई है या नहीं।

याचिकाकर्ताओं का आरोप—deputation घटने के बजाय बढ़ी

CAPF cadre officers की ओर से पेश अधिवक्ता गुरु कृष्णकुमार ने अदालत में आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट ने IPS अधिकारियों की deputation को धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया था, लेकिन व्यवहार में इसे घटाने के बजाय बढ़ाया गया।

याचिकाकर्ताओं की मुख्य चिंता यह है कि वरिष्ठ पदों पर अधिक deputation से CAPF के अपने cadre officers के promotion और career progression के अवसर प्रभावित होते हैं।

केंद्र ने क्या बताया?

केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पांचों CAPF में Group-A के कुल 13,491 पद हैं।

इनमें से 213 पद IPS अधिकारियों की deputation के लिए स्वीकृत हैं और वर्तमान में लगभग 129 पदों पर IPS अधिकारी तैनात हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान स्पष्ट किया कि मई 2025 के अपने फैसले में उसने IPS deputation को पूरी तरह समाप्त करने को नहीं कहा था।

अदालत का उद्देश्य यह था कि SAG स्तर तक deputation posts को चरणबद्ध तरीके से कम किया जाए, जिससे CAPF cadre officers को वरिष्ठ पदों पर आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिल सकें।

CAPF officers के promotion stagnation का है बड़ा मुद्दा

CAPF के Group-A cadre officers लंबे समय से promotion में देरी और senior ranks तक पहुंचने में अत्यधिक समय लगने का मुद्दा उठाते रहे हैं।

यही कारण है कि cadre review इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण है।

Cadre review के जरिए आम तौर पर यह देखा जाता है कि:

  • मौजूदा पदों की संख्या पर्याप्त है या नहीं
  • promotion pyramid में बदलाव की जरूरत है या नहीं
  • senior posts की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए या नहीं
  • cadre officers को समय पर promotion मिल रहा है या नहीं
  • deputation और cadre posts के बीच संतुलन कैसा होना चाहिए

इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट इस मामले में केवल प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने से संतुष्ट नहीं दिख रहा है।

गृह मंत्रालय को दाखिल करना होगा विस्तृत हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय से संबंधित दस्तावेज और विस्तृत affidavit दाखिल करने को कहा है।

इसमें खास तौर पर पांचों CAPF में IPS deputation की 23 मई 2025 की स्थिति और वर्तमान स्थिति का तुलनात्मक विवरण देना होगा।

यह डेटा इस मामले में महत्वपूर्ण होगा क्योंकि इससे अदालत को यह समझने में मदद मिलेगी कि उसके निर्देशों के बाद वास्तव में ground level पर क्या बदलाव हुआ है।

गृह सचिव के खिलाफ अवमानना मामला भी जुड़ा

यह पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट के 23 मई 2025 के आदेश के कथित गैर-अनुपालन से जुड़ा हुआ है।

इसी संदर्भ में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन के खिलाफ contempt proceedings भी शुरू की गई हैं।

अदालत यह जांच रही है कि मई 2025 में दिए गए निर्देशों को निर्धारित समय के भीतर क्यों लागू नहीं किया गया।

CAPF (General Administration) Act, 2026 के बाद बढ़ी अहमियत

यह मामला CAPF (General Administration) Act, 2026 लागू होने के बाद और महत्वपूर्ण हो गया है।

नए कानून में CAPF के senior administrative posts और deputation structure को लेकर अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं।

इसी कारण अब यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि नए कानून और सुप्रीम कोर्ट के मई 2025 के फैसले के बीच व्यवहारिक स्तर पर CAPF cadre officers के promotion और senior posts पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

CAPF Group-A officers की ओर से नए कानून के कुछ प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है।

30 नवंबर और 9 दिसंबर पर रहेगी नजर

अब सबसे महत्वपूर्ण तारीख 30 नवंबर 2026 है।

इस तारीख तक कैडर रिव्यू कमेटी को अपना प्रस्ताव मंजूरी के लिए आगे भेजना होगा।

इसके बाद 9 दिसंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट फिर मामले की सुनवाई करेगा।

अगली सुनवाई में अदालत यह देख सकती है कि:

कैडर रिव्यू कितना आगे बढ़ा, IPS deputation की स्थिति में क्या बदलाव आया और मई 2025 के आदेशों का वास्तविक रूप से कितना पालन हुआ।

CAPF Group-A अधिकारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

यह मामला सामान्य CAPF जवानों की service conditions का मामला नहीं है, बल्कि मुख्य रूप से Group-A cadre officers की service structure से जुड़ा है।

इसका सीधा संबंध उनके:

promotion, cadre strength, senior posts, career progression, stagnation और IPS deputation से है।

इसलिए 30 नवंबर तक होने वाली कार्रवाई और 9 दिसंबर की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई BSF, CRPF, CISF, ITBP और SSB के Group-A cadre officers के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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Editorial Desk – News of Paramilitary

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