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मिजोरम: BSF के दो जवानों को गैंगरेप और एसिड अटैक मामले में 20 साल की कठोर कैद

मिजोरम की एक अदालत ने नौ साल पुराने गैंगरेप और एसिड अटैक मामले में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के दो जवानों को दोषी ठहराते हुए 20-20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया और उन पर जुर्माना भी लगाया।

अदालत ने सुनाई 20 साल की कठोर कैद

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-1, आइजोल न्यायिक जिला, सिल्वी जोमुआनपुई राल्ते ने आरोपी नीलांजन दास और दिनेश कुमार को IPC की धारा 376D (सामूहिक दुष्कर्म), 376(2)(m) और 326A (एसिड अटैक) के तहत दोषी करार दिया।

अदालत ने गैंगरेप के लिए दोनों को 20 वर्ष की कठोर कैद, गंभीर प्रकृति के दुष्कर्म के लिए 10 वर्ष और एसिड अटैक के लिए 12 वर्ष की सजा सुनाई। इसके अलावा प्रत्येक आरोपी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं चुकाने पर दो महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।

कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और जांच व मुकदमे के दौरान जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला जुलाई 2017 का है। मिजोरम के मामित जिले में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, 16 जुलाई 2017 को एक महिला अपनी सहेली के साथ नदी किनारे केकड़े और जंगली सब्जियां इकट्ठा करने गई थी। इसी दौरान दो अज्ञात लोगों ने उसे पकड़ लिया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

इतना ही नहीं, आरोपियों ने पीड़िता के चेहरे पर संक्षारक पदार्थ (एसिड) डाल दिया, जिससे उसका चेहरा बुरी तरह झुलस गया और उसकी आंखों की रोशनी भी प्रभावित हुई।

पीड़िता ने BSF वर्दी में आरोपियों की पहचान की

अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, पीड़िता ने दुभाषिए की मदद से दिए गए बयान में बताया कि दोनों आरोपी BSF की वर्दी में थे और उनके पास एक टिफिन बॉक्स था। उसने आरोप लगाया कि दोनों ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर उसके चेहरे पर जलाने वाला रसायन डाल दिया।

मेडिकल जांच में डॉक्टरों ने पाया कि पीड़िता के चेहरे और आंखों पर रासायनिक पदार्थ से गंभीर चोटें आई थीं। मेडिकल रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उसके साथ हाल ही में जबरन यौन संबंध बनाए जाने के संकेत मिले हैं।

ड्यूटी रोस्टर से हुई आरोपियों की पहचान

जांच के दौरान पुलिस ने BSF के ड्यूटी रिकॉर्ड की जांच की। ड्यूटी रोस्टर से पता चला कि घटना के समय नीलांजन दास और दिनेश कुमार भोजन पहुंचाने की ड्यूटी पर तैनात थे। इसके बाद दोनों को संदिग्ध मानते हुए जांच आगे बढ़ाई गई।

सितंबर 2017 में न्यायिक मजिस्ट्रेट की निगरानी में टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (TIP) कराई गई, जिसमें पीड़िता ने दोनों आरोपियों की पहचान की। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

पीड़िता की सहेली का शव भी मिला

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता की लापता सहेली का शव बरामद किया। शव काफी सड़-गल चुका था, लेकिन घटनास्थल की परिस्थितियों और फोरेंसिक जांच से संकेत मिले कि उसकी मौत दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या थी और यह उसी घटना से जुड़ी हुई थी।

फोरेंसिक जांच में मृतका के शरीर के ऊतकों पर संक्षारक पदार्थ के प्रभाव के प्रमाण मिले, जिससे यह शक और मजबूत हुआ कि दोनों घटनाओं के पीछे एक ही आरोपी थे।

18 गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला

चार्जशीट में कुल 19 गवाहों को शामिल किया गया था, जिनमें से 18 की अदालत में गवाही हुई। अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट, फोरेंसिक सबूत, पीड़िता के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।

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