शादी छिपाने के आरोप में हटाए गए SSB अधिकारी को हाईकोर्ट से राहत, नौकरी पर बहाली के आदेश
लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शादी छिपाने के आरोप में सेवा से हटाए गए सशस्त्र सीमा बल (SSB) के एक अधिकारी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनकी बर्खास्तगी का आदेश रद्द करते हुए विभाग को उन्हें तत्काल ड्यूटी पर वापस लेने का निर्देश दिया है।
मामला उस महिला की शिकायत से जुड़ा था, जिसने दावा किया था कि अधिकारी के साथ वर्ष 2007 में प्रयागराज के एक आर्य समाज मंदिर में विवाह हुआ था। महिला ने अधिकारी के विभाग में शिकायत करने के साथ-साथ सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भी आवेदन दिया था और अपने नाम को अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड में शामिल करने की मांग की थी।
क्या था पूरा मामला?
SSB अधिकारी वर्ष 2009 में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर भर्ती हुए थे और 2016 में डिप्टी कमांडेंट पद पर पदोन्नत हुए। विभाग ने महिला के विवाह संबंधी दावे को सही मानते हुए आरोप लगाया कि अधिकारी ने सेवा में शामिल होते समय अपनी वैवाहिक स्थिति छिपाई थी। इसके बाद 28 अप्रैल 2022 को उन्हें सेवा से हटा दिया गया।
हालांकि, मामले से जुड़े आपराधिक मुकदमे में ट्रायल कोर्ट ने अधिकारी को बरी कर दिया था। अदालत के सामने महिला के बयान में भी विरोधाभास पाए गए थे। सुनवाई के दौरान महिला ने खुद स्वीकार किया था कि कथित विवाह में हिंदू रीति-रिवाज और सप्तपदी नहीं हुई थी।
प्रयागराज के स्थानीय पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट में भी ग्रामीणों के हवाले से कहा गया था कि महिला का परिवार अधिकारी से उसका विवाह कराना चाहता था, लेकिन ऐसा विवाह वास्तव में नहीं हुआ था। महिला की धारा 125 सीआरपीसी की अर्जी भी पहले ही खारिज हो चुकी थी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
अधिकारी की ओर से दलील दी गई कि केवल आर्य समाज मंदिर का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने से हिंदू विवाह साबित नहीं होता। इसके लिए कानून के अनुसार आवश्यक वैवाहिक रस्मों का पूरा होना जरूरी है।
कोर्ट ने Priya Balan Ghosh vs Suresh Chandra Ghosh मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए माना कि हिंदू विवाह के लिए आवश्यक रस्मों का संपन्न होना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि जब महिला ने खुद स्वीकार किया है कि आवश्यक हिंदू रस्में और सप्तपदी नहीं हुई थीं, तो केवल आर्य समाज प्रमाण पत्र के आधार पर विवाह को वैध नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने यह भी माना कि जब वर्ष 2007 का कथित विवाह ही कानून की नजर में वैध विवाह नहीं था, तो वर्ष 2015 में अधिकारी द्वारा किए गए दूसरे विवाह को सेवा में उनकी अनुपयुक्तता का आधार नहीं बनाया जा सकता।
बर्खास्तगी का आदेश रद्द
हाईकोर्ट ने 28 अप्रैल 2022 के सेवा से हटाने के आदेश को रद्द कर दिया और अधिकारी को तत्काल ड्यूटी पर वापस लेने का निर्देश दिया। हालांकि, हटाए जाने से लेकर कोर्ट के आदेश तक की अवधि को ‘No Work, No Pay’ माना जाएगा। इस अवधि को सेवा में ब्रेक भी नहीं माना जाएगा।
फैसले के बाद SSB अधिकारी की सेवा बहाली का रास्ता साफ हो गया है।

