BSF जवान के अटैचमेंट और पत्नी के इलाज से जुड़ा मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने विभाग को 10 दिन में स्पीकिंग ऑर्डर जारी करने का दिया निर्देश
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक जवान के अटैचमेंट से जुड़े मानवीय मामले में अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने BSF अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जवान की पत्नी के इलाज के आधार पर दिए गए प्रत्यावेदन पर 10 दिन के भीतर Speaking Order (कारण सहित विस्तृत आदेश) जारी किया जाए।
यह आदेश न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति अमित शर्मा की खंडपीठ ने W.P.(C) 13618/2026 – रवींद्र कुमार शर्मा बनाम भारत सरकार व अन्य में पारित किया।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता रवींद्र कुमार शर्मा BSF में कार्यरत हैं और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही (Disciplinary Proceedings) चल रही है।
इसी दौरान BSF के आदेश संख्या 22013/103/2016/Staff(E)/BSF/10233-36 दिनांक 01.09.2026 के तहत उन्हें दिल्ली से हटाकर हरियाणा के हिसार स्थित 09वीं वाहिनी BSF, हिसार में अटैच कर दिया गया।
याची ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उनकी पत्नी का लगातार मेडिकल ट्रीटमेंट दिल्ली-NCR में चल रहा है। अगर उन्हें हिसार भेजा गया तो इलाज बाधित हो जाएगा।
याचिकाकर्ता की दो मुख्य मांगें थीं:
- हिसार अटैचमेंट के आदेश को रद्द कर संशोधित किया जाए।
- जब तक विभागीय जांच लंबित है, उन्हें दिल्ली-NCR के किसी भी BSF प्रतिष्ठान में समायोजित किया जाए ताकि पत्नी का इलाज जारी रह सके।
कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने विभाग को पहले ही इस संबंध में एक औपचारिक Representation दे रखा है, जो अभी अधिकारियों के पास लंबित है।
इस पर खंडपीठ ने कहा कि जब Representation पहले से लंबित है, तो पहले विभाग को ही उस पर निर्णय लेना चाहिए।
हाईकोर्ट का आदेश –
कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए BSF प्राधिकारियों को निर्देश दिया:
“याचिकाकर्ता के लंबित प्रत्यावेदन पर आज से 10 दिन के भीतर एक Speaking Order पारित किया जाए और इसकी सूचना याचिकाकर्ता को दी जाए।”
साथ ही कोर्ट ने सभी लंबित आवेदनों (CM APPL. 63637/2026) का भी निस्तारण कर दिया।
क्यों महत्वपूर्ण है ये आदेश?
हाईकोर्ट ने फिलहाल अटैचमेंट आदेश को सीधे रद्द नहीं किया है, लेकिन BSF को मानवीय आधार (Medical Ground) पर विचार करने के लिए बाध्य किया है। अगर 10 दिन में BSF का आदेश संतोषजनक नहीं होता है, तो जवान दोबारा न्यायालय की शरण ले सकता है।
यह आदेश उन हजारों CAPF कर्मियों के लिए एक नजीर है, जो मेडिकल या पारिवारिक आधार पर अटैचमेंट / ट्रांसफर में राहत मांगते हैं।

