15 साल का इंतजार खत्म: CRPF के 300 सहायक कमांडेंट को जल्द मिलेगी पहली पदोन्नति
नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे ग्राउंड कमांडरों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लगभग डेढ़ दशक से पहली पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे करीब 300 सहायक कमांडेंट अब डिप्टी कमांडेंट बनने जा रहे हैं। सर्वोच्च अदालत द्वारा विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) पर लगाया गया स्टे हटाए जाने के बाद पदोन्नति प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
स्टे हटते ही सक्रिय हुआ सीआरपीएफ मुख्यालय
सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलते ही सीआरपीएफ मुख्यालय हरकत में आ गया है। 17 अप्रैल को जारी आदेश में सभी जोन, ग्रुप सेंटर और यूनिटों को निर्देश दिया गया है कि डिप्टी कमांडेंट पद पर पदोन्नति के लिए पात्र सहायक कमांडेंट (जीडी) की मेडिकल रिपोर्ट तत्काल मुख्यालय भेजी जाए।
मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि एएमई/आरएमई मेडिकल रिपोर्ट को अधिकृत अधिकारी से काउंटर साइन कराकर तुरंत प्रेषित किया जाए। यदि संबंधित अधिकारी अवकाश या ड्यूटी के कारण स्टेशन से बाहर हैं, तो लिंक अधिकारी द्वारा रिपोर्ट प्रमाणित कर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार अगले सप्ताह पदोन्नति आदेश जारी किए जा सकते हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट तय करेगा वरिष्ठता
सुप्रीम कोर्ट ने डीपीसी से स्टे हटाते हुए कहा है कि संबंधित अधिकारियों की वरिष्ठता का अंतिम निर्णय दिल्ली हाईकोर्ट करेगा। सहायक कमांडेंट की ‘डेट ऑफ ज्वाइनिंग’ से जुड़े विवाद के कारण यह मामला वर्षों से अदालत में लंबित था, जिसके चलते रिक्त पद होने के बावजूद पदोन्नति नहीं हो पा रही थी।
जानकारी के अनुसार 43 बैच के सभी अधिकारी और 44 बैच के कुछ अधिकारियों को डिप्टी कमांडेंट पद पर पदोन्नति मिलेगी। इनमें करीब 40 अधिकारी ऐसे भी हैं जो वर्तमान में प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं।
गृह मंत्रालय में उठा था मामला
पिछले वर्ष केंद्रीय गृह मंत्रालय में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली और पदोन्नति में हो रही असामान्य देरी पर चिंता जताई थी। उन्होंने निर्देश दिए थे कि अदालत में प्रभावी पैरवी कर पदोन्नति का रास्ता जल्द खोला जाए। इसके बाद वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों की राय लेकर मामले को आगे बढ़ाया गया।
डेढ़ दशक से इंतजार कर रहे थे ग्राउंड कमांडर
सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट आतंकवाद-रोधी और नक्सल ऑपरेशन, चुनाव ड्यूटी तथा आपदा प्रबंधन जैसे संवेदनशील अभियानों में कंपनी कमांडर की भूमिका निभाते हैं। बावजूद इसके, कई अधिकारियों को पहली पदोन्नति पाने में 15 साल तक इंतजार करना पड़ा।
पदोन्नति में लगातार देरी से अधिकारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा था। पूर्व में डीजी स्तर पर हुई बातचीत में कई ग्राउंड कमांडरों ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा था कि आधी सेवा बीत जाने के बावजूद एक भी पदोन्नति नहीं मिल रही है।
‘हमारा क्या कसूर?’—अधिकारियों की नाराजगी
कैडर अधिकारियों का कहना रहा कि अदालत में लंबित मामलों का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। उनका तर्क था कि कोर्ट केस चलते रहने के बावजूद “सब्जेक्ट टू कोर्ट जजमेंट” के आधार पर पदोन्नति दी जा सकती थी। अधिकारियों ने विभागीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई में ढिलाई के आरोप भी लगाए थे।
अब खुला पदोन्नति का रास्ता
सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टे हटाए जाने के बाद अब करीब 300 सहायक कमांडेंट डिप्टी कमांडेंट बनने जा रहे हैं। लंबे समय से चली आ रही पदोन्नति की बाधा हटने से सीआरपीएफ के ग्राउंड कमांडरों में उत्साह का माहौल है और इसे बल के मनोबल के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

