CISF जवानों के 5% HRA कटौती पर बड़ा अपडेट, गृह मंत्रालय के निर्देश पर CISF ने 8वें वेतन आयोग को भेजा मामला
देशभर में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों के हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में हो रही 5 प्रतिशत की कटौती को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक अपडेट सामने आया है। गृह मंत्रालय (MHA) के निर्देश के बाद अब बैरक में रहने वाले जवानों को पूरा HRA देने का मामला आधिकारिक तौर पर 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के समक्ष भेज दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
CISF यूनिट्स और बटालियनों में पारिवारिक आवास (Family Accommodation) न मिलने की स्थिति में जवानों को दिए जाने वाले HRA में से 5% की कटौती की जाती रही है।
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने Union of India vs Paramisivan M (Civil Appeal No 4967 of 2023) में 8 फरवरी 2024 को फैसला सुनाते हुए जवानों के HRA के अधिकार को सही ठहराया था और शेष 5% HRA भुगतान के मामलों को भी इसी आधार पर निपटाने का निर्देश दिया था।
- समान नीति की मांग: जवानों की मांग रही है कि नियम 61(2) और शीर्ष अदालत के आदेश के तहत देशभर के सभी पात्र जवानों को 5% कटौती वापस कर पूरा HRA और उसका एरियर दिया जाए।
गृह मंत्रालय और CISF का आधिकारिक रुख
एक आधिकारिक शिकायत (Grievance) के निपटारे में CISF मुख्यालय द्वारा जारी रिमार्क्स के अनुसार:
- CISF इकाइयों में तैनात जवानों को पूरा HRA देने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय (MHA) को भेजा गया था।
- गृह मंत्रालय ने इस मामले को 8वें वेतन आयोग के सामने उठाने की सलाह दी।
- गृह मंत्रालय के निर्देश पर CISF निदेशालय ने पत्र संख्या
E-42099/8th CPC/Misc/2026/Pers-III/306(दिनांक 11 मई 2026) के जरिए बैरक में रहने वाले जवानों को शत-प्रतिशत HRA देने का मुद्दा 8वें वेतन आयोग को संदर्भित कर दिया है।
जवानों के लिए इसके क्या मायने हैं?
गृह मंत्रालय द्वारा मामले को 8वें वेतन आयोग के पाले में डालने से यह साफ हो गया है कि बैरक में रहने वाले CISF जवानों के HRA नियमों और 5% कटौती के स्थायी समाधान पर अब वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

