CRPF के 198 जवानों का Risk & Hardship Allowance मामला पहुंचा हाईकोर्ट, ₹7,469 की रिकवरी को दी चुनौती
गुवाहाटी, 31 अगस्त 2026। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के करीब 198 अधिकारियों और जवानों से जुड़े Risk & Hardship Allowance की रिकवरी का मामला गुवाहाटी हाईकोर्ट पहुंच गया है। याचिकाकर्ताओं ने जून 2026 में जारी उस संचार को चुनौती दी है, जिसके जरिए उन्हें पहले से दिए गए ₹7,469 प्रति माह के Risk & Hardship Allowance की रिकवरी करने की बात कही गई थी।
मामला Insp. GD Hijam Amit Kumar Singh एवं 197 अन्य बनाम Union of India एवं अन्य है। यह याचिका WP(C)/4594/2026 के रूप में गुवाहाटी हाईकोर्ट में दाखिल की गई है और इसकी सुनवाई न्यायमूर्ति Nelson Sailo के समक्ष हुई।
₹7,469 प्रति माह की रिकवरी को दी चुनौती
कोर्ट के 26 अगस्त 2026 के आदेश के अनुसार, याचिकाकर्ताओं की शिकायत 11 जून 2026 के उस Communication से है, जिसके तहत CRPF कर्मियों को पहले से प्रदान किया गया Risk & Hardship Allowance ₹7,469 प्रति माह की दर से वापस वसूलने की बात कही गई थी।
याचिका में शामिल कर्मियों में ऐसे CRPF personnel भी हैं, जो पहले 140 बटालियन CRPF में तैनात रहे थे। कोर्ट रिकॉर्ड में 198 याचिकाकर्ताओं का विवरण दर्ज है।
हाईकोर्ट ने उठाया jurisdiction का सवाल
26 अगस्त को सुनवाई के दौरान गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की पुरानी यूनिट 140 बटालियन CRPF, Ambassa, Tripura में तैनात थी और Tripura का अपना अलग High Court है।
इसी वजह से कोर्ट के सामने यह सवाल आया कि क्या ऐसे मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट के पास सुनवाई का क्षेत्राधिकार (jurisdiction) है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने मामले में निर्देश प्राप्त करने के लिए कुछ समय मांगा। इसके बाद कोर्ट ने मामले को 28 अगस्त 2026 को दोबारा सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
अभी Allowance पर कोई अंतिम फैसला नहीं
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 26 अगस्त के आदेश में हाईकोर्ट ने Risk & Hardship Allowance की रिकवरी को सही या गलत घोषित नहीं किया है। कोर्ट ने अभी मामले के मूल विवाद यानी ₹7,469 की रिकवरी के merits पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है।
इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि हाईकोर्ट ने CRPF जवानों के पक्ष में फैसला दे दिया है या रिकवरी पर रोक लगा दी है।
CRPF कर्मियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
Risk & Hardship Allowance उन स्थानों और परिस्थितियों में तैनात कर्मियों से जुड़ा महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ है, जहां सेवा की परिस्थितियां सामान्य तैनाती की तुलना में अधिक कठिन और जोखिमपूर्ण होती हैं।
यदि पहले से दिए गए allowance की recovery का मामला आगे merits पर सुनवाई तक पहुंचता है, तो इससे यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो सकता है कि किस अवधि के लिए allowance देय था, भुगतान किस आदेश/नीति के तहत हुआ और बाद में उसकी recovery किस आधार पर मांगी गई।
फिलहाल मामले में सबसे महत्वपूर्ण अगला पहलू यह है कि गुवाहाटी हाईकोर्ट इस याचिका पर अपने jurisdiction को लेकर क्या रुख अपनाता है।
नोट: यह खबर 26 अगस्त 2026 के उपलब्ध न्यायालयीन आदेश पर आधारित है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार उस तारीख तक allowance recovery के merits पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ था। 28 अगस्त के लिए मामले को सूचीबद्ध किया गया था।

