CAPF कैडर अधिकारियों को मिल सकती है बड़ी राहत, कैडर रिव्यू प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के पास पहुंचा
नई दिल्ली: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के कैडर अधिकारियों के लिए लंबे समय से चली आ रही पदोन्नति और कैडर संरचना से जुड़ी मांगों पर अब निर्णायक पहल की उम्मीद बढ़ गई है। सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न केंद्रीय अर्धसैनिक बलों से प्राप्त कैडर रिव्यू प्रस्ताव को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मंजूरी मिल चुकी है। गृह मंत्रालय के आंतरिक वित्तीय प्रभाग ने भी प्रस्ताव पर सहमति जता दी है।
इसके बाद प्रस्ताव को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) भेजा गया, जहां से भी इसे हरी झंडी मिलने की बात सामने आई है। अब यह फाइल केंद्रीय वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के पास बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, यदि वित्त मंत्रालय से भी मंजूरी मिलती है तो अगले महीने तक सीएपीएफ के 13 हजार से अधिक कैडर अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है।
करीब एक दशक से चल रही है कानूनी लड़ाई
सीएपीएफ के कैडर अधिकारी लंबे समय से पदोन्नति, नेतृत्व के अवसर और कैडर पदों की पर्याप्त संख्या को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के 23 मई 2025 के फैसले के बाद इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर कैडर संरचना की समीक्षा और उसे अधिक संतुलित बनाने की दिशा में कदम उठाने का दबाव बढ़ा। सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसएसबी, सीआईएसएफ और आईटीबीपी की ओर से मई से जुलाई 2026 के बीच गृह मंत्रालय को कैडर रिव्यू के प्रस्ताव भेजे गए थे। इसके बाद 27 जुलाई से 3 अगस्त के बीच संबंधित प्रस्ताव DoPT को भेजे गए।
गृह सचिव के शपथ पत्र में क्या कहा गया?
केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की ओर से 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अनुपालन शपथ पत्र में कहा गया कि 23 मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को उसकी मूल भावना के अनुरूप लागू करने के लिए कई सक्रिय कदम उठाए गए हैं।
शपथ पत्र के मुताबिक, 26 दिसंबर 2025 और 3 फरवरी 2026 को सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को अपने मौजूदा ग्रुप ‘ए’ कैडर की व्यापक समीक्षा करने और विस्तृत कैडर रिव्यू प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजने के निर्देश दिए गए थे।
गृह सचिव ने बताया कि कैडर रिव्यू की समीक्षा पूरी हो चुकी है और गृह मंत्रालय के आंतरिक वित्तीय प्रभाग ने भी प्रस्ताव पर सहमति जताई है। गृह मंत्री की सहमति के बाद इसे DoPT की मंजूरी के लिए भेजा गया था।
यह पूरा मामला सीएपीएफ को ऑर्गनाइज्ड ग्रुप ‘ए’ सर्विसेज (OGAS) के अनुरूप लाभ देने, कैडर की समीक्षा करने और भर्ती नियमों में आवश्यक बदलाव से जुड़ा है।
आईपीएस प्रतिनियुक्ति और कैडर अधिकारियों का मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने 23 मई 2025 के फैसले में सीएपीएफ के कैडर अधिकारियों की पदोन्नति और नेतृत्व के अवसरों से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की थीं। फैसले में इस बात पर ध्यान दिया गया कि आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के कारण कैडर अधिकारियों के करियर में पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
शीर्ष अदालत ने सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (SAG) स्तर तक आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को अगले दो वर्षों में धीरे-धीरे कम करने की दिशा में कदम उठाने को कहा था।
कैडर अधिकारियों का तर्क रहा है कि बलों में वरिष्ठ पदों पर पर्याप्त कैडर अधिकारियों को अवसर मिलने से न केवल उनकी पदोन्नति की समस्या दूर होगी, बल्कि बलों के भीतर विशेषज्ञता और नेतृत्व की निरंतरता भी मजबूत होगी।
28 अक्टूबर 2025 को रिव्यू पिटीशन भी खारिज
इस मामले में कैडर अधिकारियों को 28 अक्टूबर 2025 को उस समय बड़ी कानूनी राहत मिली, जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की रिव्यू पिटीशन खारिज कर दी।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के मूल फैसले के बाद केंद्र सरकार ने समीक्षा याचिका दायर की थी। रिव्यू पिटीशन खारिज होने के बाद कैडर अधिकारियों के बीच यह उम्मीद जगी कि अब सरकार अदालत के निर्देशों को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।
हालांकि, कैडर अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर भी चिंता बनी रही कि पहले अदालत से राहत मिलने के बावजूद उसके वास्तविक लाभ पदोन्नति और आर्थिक मामलों में अपेक्षित रूप से नहीं मिल पाए थे।
नए सीएपीएफ एक्ट के बाद भी बना हुआ है सवाल
कैडर अधिकारियों का एक वर्ग नए सीएपीएफ कानून के प्रावधानों को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज करा चुका है। उनका कहना है कि नए कानून के बाद भी यदि वरिष्ठ पदों पर प्रतिनियुक्ति का स्वरूप पहले जैसा रहता है तो कैडर रिव्यू का वास्तविक उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं होगा।
बताया जाता है कि नए सीएपीएफ एक्ट के बाद केंद्रीय बलों में कई आईपीएस अधिकारियों ने प्रतिनियुक्ति पर पदभार ग्रहण किया है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित कैडर रिव्यू और नए कानून के प्रावधानों के बीच सरकार किस तरह संतुलन स्थापित करती है।
कैडर रिव्यू से बढ़ सकते हैं वरिष्ठ पद
कैडर रिव्यू प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में सहायक कमांडेंट से लेकर एडीजी स्तर तक विभिन्न पदों की संख्या और जिम्मेदारियों में बदलाव की संभावना है। इससे बटालियन, सेक्टर और जोन स्तर पर कैडर अधिकारियों के लिए पदों के अवसर बढ़ सकते हैं।
इसका सीधा असर पदोन्नति की संभावनाओं पर पड़ सकता है। विशेष रूप से डीआईजी और आईजी स्तर पर कैडर अधिकारियों को अधिक जिम्मेदारियां मिलने की संभावना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
CRPF के प्रस्ताव को लेकर सामने आई अलग तस्वीर
सूत्रों के मुताबिक, सीआरपीएफ के कैडर रिव्यू को लेकर शुरुआती स्तर पर तैयार किए गए प्रस्ताव में बड़ी संख्या में पदों का प्रावधान था। इसमें कथित तौर पर निम्न पद शामिल थे:
- एडीजी – 4
- आईजी – 16
- डीआईजी – प्रस्ताव में शामिल
- कमांडिंग ऑफिसर (CO) – 180
- टू-आईसी – 490
- डिप्टी कमांडेंट – 346
- असिस्टेंट कमांडेंट – 37
- कुल – 1,117 पद
हालांकि, सूत्रों का कहना है कि कैडर रिव्यू कमेटी की ओर से सीआरपीएफ मुख्यालय को भेजे गए शुरुआती प्रस्ताव की तुलना में बाद में गृह मंत्रालय को भेजे गए प्रस्ताव में करीब आधे पद कम कर दिए गए। इस अंतर को लेकर भी कैडर अधिकारियों के बीच चर्चा है।
OGAS और NFFU पर भी टिकी नजर
कैडर रिव्यू प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलने के साथ ही सीएपीएफ कैडर अधिकारियों से जुड़े दो अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों—ऑर्गनाइज्ड ग्रुप ‘ए’ सर्विसेज (OGAS) और नॉन-फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (NFFU)—के समाधान की उम्मीद भी बढ़ गई है।
यदि वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो यह सीएपीएफ कैडर अधिकारियों के लिए लंबे समय से चले आ रहे विवाद को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।
फिलहाल, सभी की नजर वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के फैसले पर है। प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस बल में कितने पद बढ़ेंगे, पदोन्नति संरचना में क्या बदलाव होगा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को जमीन पर किस तरह लागू किया जाएगा।
नोट: कैडर रिव्यू में प्रस्तावित पदों और वित्त मंत्रालय की अंतिम मंजूरी से जुड़े आंकड़ों में बदलाव संभव है। अंतिम स्थिति सरकार की स्वीकृति और आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

