CRPF में आत्महत्या रोकने के लिए 10 सदस्यीय कोर ग्रुप गठित, हर महीने होगी मामलों की समीक्षा
नई दिल्ली। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में कर्मियों द्वारा खुद को नुकसान पहुंचाने और साथियों पर फायरिंग जैसी गंभीर घटनाओं की रोकथाम के लिए बल मुख्यालय ने एक अहम कदम उठाया है। सीआरपीएफ महानिदेशक जीपी सिंह की अध्यक्षता में एक 10 सदस्यीय कोर ग्रुप गठित किया गया है। यह समूह ऐसी घटनाओं की नियमित समीक्षा करेगा और उनकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए जरूरी संस्थागत उपाय सुझाएगा।
कोर ग्रुप में डीजी के अलावा बल के वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं। समूह की हर महीने सीआरपीएफ मुख्यालय में बैठक होगी। सामान्य तौर पर बैठक महीने के तीसरे सप्ताह में आयोजित करने का प्रावधान किया गया है।
डीजी की अध्यक्षता में बना कोर ग्रुप
कोर ग्रुप में निम्न अधिकारी शामिल हैं—
- एसडीजी (ऑपरेशन्स)
- एसडीजी (प्रशासन)
- एडीजी (मुख्यालय)
- आईजी (ऑपरेशन्स)
- आईजी (कार्मिक)
- आईजी (प्रशासन)
- आईजी (चिकित्सा)
- डीआईजी (ओपीएस-2)
- डीआईजी (कल्याण) — संयोजक
डीजी सीआरपीएफ इस समूह के अध्यक्ष होंगे, जबकि डीआईजी (कल्याण) को संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है।
हर महीने होगी सभी मामलों की विस्तृत समीक्षा
कोर ग्रुप पिछली समीक्षा अवधि में सामने आए खुद को नुकसान पहुंचाने के सभी मामलों की विस्तृत समीक्षा करेगा। इसमें घटना के कारणों और परिस्थितियों के साथ-साथ संबंधित कर्मी को उपलब्ध कराई गई कल्याणकारी, चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता की भी समीक्षा की जाएगी।
समिति यह भी देखेगी कि घटना के बाद संबंधित यूनिट या कार्यालय ने कौन-कौन से कदम उठाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या सुधारात्मक कार्रवाई की गई।
कमांडेंट देंगे वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रस्तुति
प्रत्येक मामले में संबंधित बटालियन या कार्यालय के एचओओ/कमांडेंट को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कोर ग्रुप के सामने करीब 4-5 स्लाइड की व्यवस्थित प्रस्तुति देनी होगी।
इस प्रस्तुति में मुख्य रूप से—
- घटना के कारण और परिस्थितियां
- संबंधित कर्मी की प्रासंगिक पृष्ठभूमि
- यूनिट/कार्यालय द्वारा की गई कार्रवाई
- उपलब्ध कराई गई कल्याणकारी और चिकित्सा सहायता
- प्रारंभिक जांच या पड़ताल के निष्कर्ष
- भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए उठाए गए विशेष कदम
शामिल होंगे।
घटना वाली यूनिट या कार्यालय के पर्यवेक्षी परिचालन पदानुक्रम से जुड़े संबंधित डीआईजी, आईजी, एडीजी/एसडीजी भी वीडियो कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगे।
हर मामले की निष्पक्ष समीक्षा करेगा समूह
कोर ग्रुप प्रत्येक मामले की निष्पक्ष समीक्षा करेगा और जरूरत के अनुसार बचाव, कल्याण, प्रशासन, चिकित्सा तथा अन्य उचित उपायों की सिफारिश करेगा।
समिति केवल अलग-अलग मामलों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। समीक्षा के दौरान सामने आने वाले सामान्य रुझानों और बार-बार दिखाई देने वाले जोखिम कारकों की भी पहचान की जाएगी। इसके आधार पर सीआरपीएफ स्तर पर संस्थागत सुधार के उपाय किए जाएंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मियों के बीच खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं को कम करने के लिए निरंतर निगरानी, समय पर हस्तक्षेप, जवाबदेही और रोकथाम के तंत्र को मजबूत करना है।
डीआईजी (कल्याण) रखेंगे कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड
कोर ग्रुप के संयोजक के रूप में डीआईजी (कल्याण) बैठकों के समन्वय और संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे। वे मामलेवार जानकारी जुटाने, बैठक का एजेंडा और संबंधित सामग्री तैयार करने, कार्यवृत्त प्रसारित करने तथा समिति की सिफारिशों और उन पर की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी रखेंगे।
समिति की सिफारिशों को दर्ज किया जाएगा और संबंधित फॉर्मेशन, यूनिट या कार्यालय द्वारा उनके अनुपालन की निगरानी की जाएगी।
एनएचआरसी ने भी जताई है चिंता
सीआरपीएफ में आत्महत्या के मामलों को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भी चिंता जता चुका है। हाल में आयोग ने इस वर्ष सीआरपीएफ कर्मियों द्वारा की गई 19 आत्महत्याओं के मामलों को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय गृह सचिव और सीआरपीएफ महानिदेशक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। दोनों अधिकारियों को निर्धारित समय के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
पांच वर्षों में 281 सीआरपीएफ कर्मियों ने की आत्महत्या
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में सीआरपीएफ में 281 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए। इनमें करीब 216 कर्मी ड्यूटी पर थे।
वर्षवार आंकड़े इस प्रकार हैं—
- 2021: 57 मामले
- 2022: 43 मामले
- 2023: 57 मामले
- 2024: 46 मामले
- 2025: 59 मामले
लगभग 3.25 लाख कर्मियों वाला सीआरपीएफ देश का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है। बल की तैनाती आतंकवाद और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के अलावा पूर्वोत्तर के उग्रवाद प्रभावित इलाकों में भी होती है। सीआरपीएफ की विशेष अभियान इकाई कोबरा (CoBRA) को भी संवेदनशील क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती हैं।
कोर ग्रुप के गठन और मासिक समीक्षा व्यवस्था को इसी व्यापक चुनौती से निपटने की दिशा में एक संस्थागत कदम माना जा रहा है। इसका फोकस घटनाओं की समीक्षा के साथ-साथ उनके पीछे मौजूद जोखिम कारकों की पहचान कर समय रहते रोकथाम के उपाय लागू करने पर रहेगा।

