दहेज प्रताड़ना मामले में CRPF हेड कांस्टेबल दोषी, कोर्ट ने सुनाई डेढ़ साल की सजा
गोपालगंज: दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा से जुड़े करीब 15 साल पुराने मामले में सिविल कोर्ट ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत जनमेजय सिंह को दोषी करार दिया है। एसडीजेएम न्यायालय ने अलग-अलग धाराओं में आरोपी को कुल डेढ़ साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
मामला कटेया थाना क्षेत्र के पुरैना कटेया गांव से जुड़ा है। लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद पीड़िता सुनीता के पक्ष में फैसला आया है।
2003 में हुई थी शादी
जानकारी के अनुसार, पुरैना कटेया गांव निवासी भगवत राय ने अपनी बेटी सुनीता की शादी वर्ष 2003 में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के पटहेरवा गांव निवासी महाश्रय सिंह के पुत्र जनमेजय सिंह के साथ हिंदू रीति-रिवाज से की थी।
शादी के करीब एक साल बाद, वर्ष 2004 में जनमेजय सिंह का चयन CRPF में सिपाही के पद पर हो गया था।
नौकरी मिलने के बाद दहेज मांगने का आरोप
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, नौकरी मिलने के बाद सुनीता से एक लाख रुपये नकद और चारपहिया वाहन की मांग की जाने लगी। आरोप है कि मांग पूरी नहीं होने पर उसके साथ शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ना की गई।
इस बीच वर्ष 2006 में सुनीता ने एक बेटी को जन्म दिया। आरोप है कि बेटी के जन्म के बाद भी प्रताड़ना जारी रही।
पत्नी और बेटी को घर से निकालने का आरोप
मामले के अनुसार, वर्ष 2010 में जब बेटी करीब चार साल की थी, तब सुनीता और उसकी बेटी को ससुराल से निकाल दिया गया। इसके बाद सुनीता ने कानूनी कार्रवाई शुरू की।
13 सितंबर 2011 को कटेया थाने में पति जनमेजय सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इस संबंध में कटेया थाना कांड संख्या 199/11 दर्ज किया गया था।
इन धाराओं के तहत चला मुकदमा
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 341, 323, 498ए, 504 और 506 के अलावा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था।
इसके बाद अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई।
करीब 15 वर्षों बाद आया फैसला
लंबी सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने जनमेजय सिंह को दोषी करार दिया।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से एसडीपीओ आनंद शर्मा और पीड़ित पक्ष की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार पाठक ने पक्ष रखा।
अदालत ने दोषसिद्धि के बाद आरोपी को विभिन्न धाराओं में कुल डेढ़ साल की सजा सुनाई और पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
यह फैसला करीब 15 वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ रही पीड़िता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

