भारत-चीन सीमा पर ITBP की ताकत बढ़ाने की तैयारी, 20 अतिरिक्त बटालियन की जरूरत; ड्रोन और आधुनिक निगरानी पर फोकस
नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा पर बदलती सुरक्षा चुनौतियों और आधुनिक युद्ध के स्वरूप को देखते हुए केंद्र सरकार भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की परिचालन क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। बल अपनी भविष्य की जरूरतों को लेकर एक संशोधित प्रस्ताव तैयार कर गृह मंत्रालय को भेजेगा। इसमें नई बटालियन बढ़ाने, सीमा चौकियों की संख्या में विस्तार, आधुनिक उपकरणों की खरीद और ड्रोन आधारित निगरानी क्षमता को मजबूत करने जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहने की संभावना है।
अधिकारियों के अनुसार, ITBP को अपनी जिम्मेदारियों और सीमा पर बढ़ती आवश्यकताओं को देखते हुए करीब 20 अतिरिक्त बटालियन की जरूरत बताई गई है। हालांकि इतनी बड़ी संख्या में नई बटालियन एक साथ खड़ी करने के बजाय सरकार आवश्यकता और संसाधनों के अनुसार इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा कर सकती है। इसके साथ ही चीन सीमा पर Border Out Posts (BOPs) बढ़ाने से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया जा रहा है।
ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर बढ़ रहा जोर
आधुनिक युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका को देखते हुए ITBP ने अपनी सीमा सुरक्षा व्यवस्था में भी इस तकनीक को प्रमुखता देना शुरू कर दिया है। हाल में ITBP महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने बताया था कि सीमा सुरक्षा में तैनात बटालियनों में ड्रोन प्लाटून विकसित किए जा रहे हैं और जवानों को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित करने के साथ बल स्तर पर तकनीकी क्षमता विकसित की जा रही है।
गृह मंत्रालय ने ITBP की एक बड़े आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी भी दी है। रिपोर्टों के अनुसार इस योजना का आकार करीब ₹4,000 करोड़ है, जिसमें लगभग ₹1,000 करोड़ ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर खर्च किए जाने की योजना है। इससे चीन सीमा पर निगरानी, वास्तविक समय में सूचनाएं जुटाने और संभावित हवाई खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में तैनाती बड़ी चुनौती
ITBP भारत-चीन सीमा पर करीब 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यहां कई स्थान अत्यधिक ऊंचाई वाले, बर्फ से ढके और सड़क संपर्क से दूर हैं। ऐसे इलाकों में जवानों को भीषण ठंड, कम ऑक्सीजन, भारी बर्फबारी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच लंबे समय तक तैनात रहना पड़ता है।
इन परिस्थितियों में केवल जवानों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। बेहतर संचार प्रणाली, विशेष वाहन, आधुनिक हथियार, निगरानी उपकरण, बिजली और हीटिंग व्यवस्था तथा तेज लॉजिस्टिक सपोर्ट भी परिचालन क्षमता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
ITBP अग्रिम इलाकों में जवानों के लिए इंसुलेटेड बैरक, सोलर वाटर हीटर, जनरेटर और अत्यधिक ठंड में वाहनों को चालू रखने के लिए विशेष कोल्ड-स्टार्ट किट जैसी सुविधाओं को भी बढ़ा रही है।
सीमा पर भूमिगत बंकर बनाने की भी तैयारी
बदलते युद्ध के तौर-तरीकों को देखते हुए ITBP सीमा क्षेत्रों में भूमिगत सुरक्षा ढांचा भी विकसित कर रही है। इसके तहत अग्रिम चौकियों पर ऐसे भूमिगत आश्रय और बंकर तैयार किए जा रहे हैं, जो संघर्ष की स्थिति में जवानों और महत्वपूर्ण संसाधनों को अतिरिक्त सुरक्षा दे सकें।
आधुनिक मिसाइल, ड्रोन और अन्य हथियार प्रणालियों के दौर में खुले स्थानों पर मौजूद भवन अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। इसलिए भूमिगत ढांचे को भविष्य की सीमा सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
Galwan जैसी परिस्थितियों के लिए विशेष प्रशिक्षण
ITBP ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संभावित टकराव की परिस्थितियों के लिए ‘Strike’ नाम से नया प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी विकसित किया है। इसका उद्देश्य जवानों को वर्ष 2020 की गलवान घाटी जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए नई युद्ध तकनीकों और रणनीतियों का प्रशिक्षण देना है। बल की योजना वर्ष 2027 के अंत तक अपने जवानों को इस तरह के प्रशिक्षण से जोड़ने की है।
इसके अलावा विशेष Shaurya Commando टीमों को पर्वतीय युद्ध, आधुनिक हथियार, ड्रोन संचालन, पर्वतारोहण और नजदीकी संघर्ष जैसी क्षमताओं में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इन विशेष दस्तों का उद्देश्य आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देना और संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।
अतिरिक्त बजट की भी होगी जरूरत
नई बटालियन, BOP, आधुनिक उपकरण, ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के साथ सीमा पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी। इसलिए ITBP की नई जरूरतों को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने के साथ अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराने पर भी सरकार के स्तर पर विचार किए जाने की संभावना है।
कुल मिलाकर भारत-चीन सीमा पर ITBP की भूमिका अब पारंपरिक गश्त और निगरानी तक सीमित नहीं रह गई है। भविष्य की रणनीति में अधिक जवान, आधुनिक तकनीक, ड्रोन आधारित निगरानी, मजबूत संचार व्यवस्था, विशेष प्रशिक्षण और बेहतर सीमा ढांचा एक साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

