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सरकारी क्वार्टर नहीं मिला तो CISF जवान को Full HRA, दिल्ली हाईकोर्ट ने बकाया भुगतान का दिया आदेश

नई दिल्ली। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों के House Rent Allowance यानी HRA से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। अदालत ने कहा है कि जिस CISF personnel को सरकारी आवास उपलब्ध नहीं कराया गया, उसे लागू नियमों और पहले से तय न्यायिक सिद्धांतों के अनुसार HRA के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

मामला SI/Exe Anil Kumar बनाम Union of India & Others का है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 अक्टूबर 2026 को इस मामले में फैसला दिया।

सरकारी आवास नहीं मिला, फिर भी पूरा HRA नहीं

मामले में CISF personnel को संबंधित अवधि के दौरान सरकारी family accommodation allot नहीं किया गया था।

इसके बावजूद उसे पूरा admissible HRA नहीं दिया गया। इसी को लेकर मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा।

याचिकाकर्ता का कहना था कि जब विभाग सरकारी accommodation उपलब्ध नहीं करा पाया, तो उसे HRA के पूरे लाभ से वंचित करना उचित नहीं है।

पुराने CISF HRA फैसलों का मिला लाभ

यह विवाद बिल्कुल नया नहीं है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने Jaspal Singh Mann बनाम Union of India मामले में पहले ही CISF personnel के HRA अधिकार से जुड़े महत्वपूर्ण सिद्धांत तय किए थे। उस मामले में CISF ने कहा था कि family accommodation या HRA केवल निर्धारित प्रतिशत personnel को seniority के आधार पर दिया जा सकता है।

लेकिन अदालत ने उस व्यवस्था के आधार पर ऐसे personnel को HRA से वंचित करने को स्वीकार नहीं किया था, जिन्हें वास्तव में सरकारी accommodation उपलब्ध नहीं कराया गया।

इसके बाद भी इसी मुद्दे पर कई CISF personnel अदालत पहुंचे।

मई 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने 110 CISF personnel की connected petitions में अतिरिक्त 5 प्रतिशत HRA की मांग स्वीकार की थी और तीन महीने के भीतर payable amount जारी करने का निर्देश दिया था। Court ने उस समय भी Jaspal Singh Mann judgment को आधार बनाया था।

Anil Kumar को भी मिली राहत

अब SI/Exe Anil Kumar के मामले में भी दिल्ली हाईकोर्ट ने उसी स्थापित legal position के आधार पर राहत दी है।

उपलब्ध judgment report के अनुसार, Court ने petitioner को 7 जून 2022 से 28 फरवरी 2025 तक Full HRA के लाभ का हकदार माना है।

अदालत ने संबंधित authorities को बकाया HRA की रकम का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

तीन महीने में भुगतान, देरी हुई तो ब्याज

फैसले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा payment deadline से जुड़ा है।

Court ने संबंधित authorities को payable HRA amount तीन महीने के भीतर जारी करने का निर्देश दिया है।

उपलब्ध judgment report के अनुसार, निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर outstanding amount पर 6 प्रतिशत सालाना simple interest भी देना होगा।

दूसरे CISF जवानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?

यह फैसला उन CISF personnel के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जिन्हें posting के दौरान सरकारी family accommodation नहीं मिला लेकिन HRA का पूरा admissible benefit भी नहीं दिया गया।

दरअसल CISF में HRA को लेकर लंबे समय से litigation चलती रही है। दिल्ली हाईकोर्ट के पुराने फैसलों से लेकर 2026 में 110 petitions के batch तक courts ने इस मुद्दे पर CISF personnel को राहत दी है। मई 2026 के batch order में Court ने साफ किया था कि Jaspal Singh Mann मामले में तय HRA principle को respondents दोबारा उसी objection के आधार पर नहीं खोल सकते।

हालांकि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि हर CISF जवान को automatically कोई नया HRA या arrears मिल जाएगा।

किसी अन्य personnel का entitlement उसकी posting, सरकारी accommodation की उपलब्धता/allotment, संबंधित अवधि, पहले मिले HRA और लागू rules/orders पर निर्भर करेगा।

लेकिन जिन personnel की परिस्थितियां इस मामले या पहले तय CISF HRA cases जैसी हैं, उनके लिए यह judgment महत्वपूर्ण legal reference बन सकता है।

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