CISF जवान को बड़ी राहत: पुराने Criminal Case नहीं बताने पर गई थी नौकरी, हाईकोर्ट ने दिया बहाली का आदेश
नई दिल्ली/कटक। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक जवान को बड़ी राहत देते हुए ओडिशा हाईकोर्ट ने उसकी सेवा समाप्त करने के आदेश को रद्द कर दिया है। मामला भर्ती के समय पुराने आपराधिक मामले की जानकारी नहीं देने से जुड़ा था। हाईकोर्ट ने परिस्थितियों को देखते हुए जवान को चार सप्ताह के भीतर दोबारा सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है।
यह फैसला 5 अक्टूबर 2026 को Surya Prakash J. बनाम Union of India मामले में दिया गया।
भर्ती से पहले ही आपराधिक मामले में हो चुका था बरी
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता की CISF में Constable के पद पर नियुक्ति वर्ष 2012 में हुई थी। उसकी नियुक्ति से पहले उसके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज हुआ था।
महत्वपूर्ण बात यह थी कि CISF की भर्ती प्रक्रिया और attestation form भरने से पहले ही संबंधित आपराधिक मामले में वह बरी हो चुका था।
बाद में CISF को verification के दौरान पुराने criminal case की जानकारी मिली। जवान पर आरोप लगा कि उसने attestation form में अपने खिलाफ रहे आपराधिक मामले और prosecution की जानकारी का खुलासा नहीं किया।
इसी आधार पर उसकी सेवा समाप्त कर दी गई। विभागीय आदेश के खिलाफ की गई अपील से भी उसे राहत नहीं मिली, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट ने परिस्थितियों पर दिया जोर
ओडिशा हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए पाया कि पुराने आपराधिक मामले की जानकारी नहीं देना ऐसा जानबूझकर किया गया तथ्य छिपाना साबित नहीं हुआ, जिसके आधार पर सेवा समाप्त करने जैसी कठोर कार्रवाई को उचित ठहराया जा सके।
अदालत ने इस बात को भी महत्वपूर्ण माना कि संबंधित व्यक्ति attestation form भरने से पहले ही आपराधिक मामले में बरी हो चुका था।
कोर्ट ने termination की कार्रवाई को परिस्थितियों की तुलना में अनुपातहीन माना और CISF द्वारा जारी सेवा समाप्ति के आदेश के साथ appellate order को भी रद्द कर दिया।
चार सप्ताह में बहाल करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने CISF को याचिकाकर्ता को चार सप्ताह के भीतर सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है।
हालांकि सेवा से बाहर रहने की पूरी अवधि के लिए उसे पूरा वेतन देने का आदेश नहीं दिया गया है। बीच की अवधि को notionally regularise किया जाएगा और judgment के अनुसार उसे अन्य स्वीकार्य service benefits दिए जाएंगे।
CAPF जवानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?
यह फैसला CISF के साथ-साथ अन्य CAPF में भर्ती और character verification से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भ बन सकता है।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी उम्मीदवार द्वारा पुराने criminal case की जानकारी नहीं देने पर हर मामले में उसे राहत मिल जाएगी।
ऐसे मामलों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित व्यक्ति को मामले में कब बरी किया गया, criminal case की प्रकृति क्या थी, जानकारी नहीं देने के पीछे परिस्थितियां क्या थीं और क्या महत्वपूर्ण तथ्य जानबूझकर छिपाया गया था।
ओडिशा हाईकोर्ट का यह फैसला इस बात पर जोर देता है कि ऐसे मामलों में केवल non-disclosure को अलग से देखकर निर्णय लेने के बजाय पूरे मामले की परिस्थितियों पर विचार किया जाना चाहिए।
इस फैसले से उन मामलों में कानूनी बहस को बल मिल सकता है जहां CAPF personnel या candidates पुराने आपराधिक मामले में पहले ही बरी हो चुके हों लेकिन verification या attestation form में उसकी जानकारी नहीं देने के कारण उनकी नियुक्ति या सेवा प्रभावित हुई हो।
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