CAPF कैडर रिव्यू पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, गृह मंत्रालय से मांगी मूल फाइलें; 27 अक्टूबर को अगली सुनवाई
नई दिल्ली। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में कैडर रिव्यू और IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को संबंधित मूल फाइलें पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत इन दस्तावेजों के जरिए यह देखना चाहती है कि पांच CAPF के कैडर रिव्यू से जुड़े प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2025 में तय की गई छह महीने की समय-सीमा के भीतर भेजे गए थे या उसके बाद प्रक्रिया शुरू की गई।
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हाल में लागू Central Armed Police Forces (General Administration) Act, 2026 से पांच बलों के कैडर रिव्यू की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी।
अदालत ने गृह मंत्रालय को 23 मई 2025 के फैसले के अनुपालन में उठाए गए कदमों, विशेष रूप से कैडर रिव्यू प्रस्तावों से संबंधित सभी जरूरी मूल रिकॉर्ड अगली सुनवाई में पेश करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सभी फाइलें अदालत के सामने रखें
सुनवाई के दौरान जस्टिस मनोज मिश्रा ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि गृह मंत्रालय इस मामले से संबंधित सभी फाइलें अदालत के सामने पेश करे।
केंद्र की ओर से कहा गया कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने के लिए सरकार ने सद्भावना के साथ कार्रवाई की है।
केंद्र ने अदालत को आश्वासन दिया कि संबंधित मूल फाइलें अगली सुनवाई के दौरान पेश कर दी जाएंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को तय की है।
CAPF अधिकारियों ने दाखिल की है अवमानना याचिका
यह मामला CAPF कैडर अधिकारियों द्वारा दाखिल अवमानना याचिका से भी जुड़ा है। अधिकारियों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के 23 मई 2025 के फैसले में दिए गए निर्देशों का निर्धारित समय में पालन नहीं किया गया।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने कैडर रिव्यू की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है।
CAPF अधिकारियों की ओर से दलील दी गई कि कैडर रिव्यू पहले ही लंबे समय से लंबित था और सुप्रीम कोर्ट ने मई 2025 के फैसले में इसे छह महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया था।
उनका कहना है कि नया CAPF कानून लागू होने से सुप्रीम कोर्ट के पहले से दिए गए कैडर रिव्यू संबंधी निर्देश समाप्त या अप्रभावी नहीं हो जाते।
दिसंबर 2025 और फरवरी 2026 के पत्रों पर सवाल
CAPF अधिकारियों की ओर से अदालत में दावा किया गया कि गृह मंत्रालय ने 26 दिसंबर 2025 और 3 फरवरी 2026 को बलों को पत्र जारी कर मौजूदा Group A कैडर की व्यापक समीक्षा करने और प्रस्ताव भेजने को कहा था।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि कैडर रिव्यू की वास्तविक प्रक्रिया इन पत्रों के माध्यम से शुरू हुई, तो यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित छह महीने की समय-सीमा समाप्त होने के बाद की कार्रवाई है।
इसी विवाद को स्पष्ट करने के लिए अब सुप्रीम कोर्ट ने मूल सरकारी फाइलें मंगाई हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मंत्रालय और संबंधित बलों के स्तर पर कैडर रिव्यू को लेकर वास्तविक कार्रवाई कब शुरू हुई थी।
केंद्र ने कहा- कैडर रिव्यू लंबी प्रक्रिया
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि कैडर रिव्यू एक विस्तृत प्रक्रिया है, जिसमें कई प्रशासनिक पहलुओं और विभागों की भागीदारी होती है।
केंद्र का कहना है कि मई 2025 के फैसले के बाद ही इस दिशा में काम शुरू कर दिया गया था। सरकार ने यह भी बताया कि फैसले के खिलाफ दायर समीक्षा याचिका 28 अक्टूबर 2025 को खारिज हुई थी।
केंद्र ने कैडर रिव्यू पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगते हुए मार्च 2026 में आवेदन भी दाखिल किया था।
IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति पर भी उठा सवाल
CAPF अधिकारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी 63 IPS अधिकारियों को CAPF में प्रतिनियुक्त किया गया।
दलील के मुताबिक इनमें:
- 32 Deputy Inspector General (DIG)
- 27 Inspector General (IG)
- 2 Commandant
शामिल हैं।
इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार, गुरु कृष्णकुमार और के. परमेश्वर समेत अन्य वकीलों ने भी केंद्र द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के कथित गैर-अनुपालन को लेकर अपनी दलीलें रखीं।
IPS प्रतिनियुक्ति पर तत्काल रोक लगाने से कोर्ट का इनकार
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल CAPF में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।
अदालत का कहना था कि पर्याप्त आंकड़ों और प्रशासनिक स्थिति को समझे बिना इस तरह का आदेश देना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे बलों में प्रशासनिक रिक्तता (administrative vacuum) की स्थिति पैदा हो सकती है।
इसलिए फिलहाल IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति जारी रह सकती है, लेकिन इससे जुड़े मुद्दे की न्यायिक समीक्षा जारी रहेगी।
2025 के फैसले में क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने?
23 मई 2025 के महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने CAPF के कैडर अधिकारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे।
इनमें सभी संबंधित बलों में लंबित कैडर रिव्यू पूरा करने के साथ ही CAPF में Senior Administrative Grade (SAG) तक IPS प्रतिनियुक्ति के लिए आरक्षित पदों को चरणबद्ध तरीके से कम करने का निर्देश शामिल था।
याचिकाकर्ता अधिकारियों का कहना है कि अदालत ने इस प्रक्रिया के लिए अधिकतम दो वर्ष की अवधि निर्धारित की थी, लेकिन उनके मुताबिक प्रतिनियुक्ति वाले पदों को कम करने की प्रक्रिया अभी तक प्रभावी रूप से शुरू नहीं हुई।
पहले 46 IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति पर भी मांगा गया था जवाब
इस अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी गृह मंत्रालय से जवाब मांग चुका है।
मामला पांच CAPF में 46 IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से जुड़ा था। अदालत ने सवाल उठाया था कि मई 2025 के फैसले के बाद इन अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति किस प्रक्रिया और आधार पर की गई।
2 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा था।
गृह मंत्रालय और Department of Personnel and Training (DoPT) से भी 2025 के फैसले के अनुपालन में उठाए गए कदमों का विवरण मांगा गया था।
नए CAPF कानून का इस विवाद पर क्या असर?
इस पूरे मामले के बीच Central Armed Police Forces (General Administration) Act, 2026 भी लागू हो चुका है। कानून 8 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हुआ।
यह कानून Group A General Duty अधिकारियों और अन्य CAPF अधिकारियों की भर्ती एवं सेवा शर्तों के लिए एक साझा कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
नए कानून में Inspector General स्तर के 50 प्रतिशत पदों तथा Additional Director General स्तर के कम से कम 67 प्रतिशत पदों को IPS प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरने का प्रावधान है।
इसके अलावा Special Director General और Director General के पद भी प्रतिनियुक्ति के जरिए भरे जाने का प्रावधान किया गया है।
इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा सुनवाई में स्पष्ट किया कि नया कानून पांच बलों के लंबित कैडर रिव्यू को प्रभावित नहीं करेगा।
अब 27 अक्टूबर की सुनवाई बेहद अहम
अब इस मामले में 27 अक्टूबर 2026 की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। उस दिन गृह मंत्रालय को संबंधित मूल फाइलें सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करनी हैं।
इन फाइलों के आधार पर अदालत मुख्य रूप से यह देख सकती है कि कैडर रिव्यू की प्रक्रिया वास्तव में कब शुरू हुई, क्या छह महीने की समय-सीमा का पालन हुआ, 2025 के फैसले के बाद IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति किस आधार पर जारी रही और केंद्र को कैडर रिव्यू पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए या नहीं।
यह मामला CAPF के Group A कैडर अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका सीधा संबंध कैडर रिव्यू, पदोन्नति के अवसर, IPS प्रतिनियुक्ति और CAPF के अपने कैडर अधिकारियों की उच्च पदों तक पहुंच से जुड़ा हुआ है।
अब सभी की नजरें 27 अक्टूबर की सुनवाई पर रहेंगी, जब गृह मंत्रालय की मूल फाइलें सुप्रीम कोर्ट के सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
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