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CAPF Act 2026: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भेजा नोटिस,IPS डेपुटेशन पर कानूनी सुनवाई शुरू

नई दिल्ली, 4 अगस्त: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के अधिकारियों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इन याचिकाओं में Central Armed Police Forces (General Administration) Act, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून सुप्रीम कोर्ट के 23 मई 2025 के ऐतिहासिक फैसले को निष्प्रभावी करने का प्रयास करता है, जिसमें CAPF में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति (Deputation) को चरणबद्ध तरीके से कम करने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और विजय बिश्नोई की पीठ ने जारी किया नोटिस

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने की। अदालत के समक्ष दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई हुई। पहली याचिका 34 CAPF अधिकारियों द्वारा तथा दूसरी 890 CAPF अधिकारियों की ओर से दायर की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

क्या है याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क?

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CAPF (General Administration) Act, 2026 संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का उल्लंघन करता है तथा शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) के संवैधानिक सिद्धांत के विपरीत है।

उनका आरोप है कि संसद ने नया कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट के पहले से दिए गए निर्णय को निष्प्रभावी करने की कोशिश की है, जबकि किसी न्यायिक निर्णय का आधार बदले बिना उसे केवल कानून बनाकर समाप्त नहीं किया जा सकता।

23 मई 2025 के फैसले में क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने?

23 मई 2025 को Sanjay Prakash v. Union of India मामले में न्यायमूर्ति ए.एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था।

उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि—

  • CAPF को Organised Group-A Services (OGAS) के रूप में माना जाएगा।
  • यह मान्यता केवल Non-Functional Financial Upgradation (NFFU) तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कैडर समीक्षा और अन्य सेवा संबंधी मामलों पर भी लागू होगी।
  • CAPF के वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को लगभग दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से कम किया जाए।

नया CAPF Act 2026 क्या कहता है?

याचिका के अनुसार संसद द्वारा पारित CAPF (General Administration) Act, 2026 में एक प्रावधान जोड़ा गया है, जिसमें कहा गया है कि “किसी भी न्यायालय के निर्णय, आदेश या डिक्री के बावजूद” केंद्र सरकार भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति तथा सेवा शर्तों के संबंध में नियम बना सकेगी।

कानून में वरिष्ठ पदों पर IPS प्रतिनियुक्ति के लिए निम्न व्यवस्था भी निर्धारित की गई है—

  • Inspector General (IG) के 50 प्रतिशत पद IPS प्रतिनियुक्ति से भरे जाएंगे।
  • Additional Director General (ADG) के कम से कम 67 प्रतिशत पद IPS अधिकारियों के लिए होंगे।
  • Special Director General (SDG) और Director General (DG) के सभी पद IPS अधिकारियों द्वारा प्रतिनियुक्ति से भरे जाएंगे।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले के विपरीत है।

‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता’

याचिका में कहा गया है कि संसद कानून में संशोधन कर सकती है, लेकिन वह किसी न्यायिक निर्णय को केवल कानून बनाकर समाप्त नहीं कर सकती, जब तक उस निर्णय के कानूनी आधार में वास्तविक परिवर्तन न किया जाए।

याचिकाकर्ताओं ने Madras Bar Association v. Union of India (2022), Indian Aluminium Co. v. State of Kerala (1996) तथा Ram Manohar Lohia v. State of Bihar (1966) सहित कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि CAPF का कार्य राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसकी कमान और कैडर व्यवस्था को राज्य पुलिस के समान नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई है?

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि—

  • CAPF (General Administration) Act, 2026 को असंवैधानिक घोषित किया जाए।
  • 23 मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू कराया जाए।
  • कैडर समीक्षा (Cadre Review) शीघ्र पूरी कराई जाए।
  • भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाएं।
  • CAPF में IPS प्रतिनियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार चरणबद्ध तरीके से कम किया जाए।

मामले का विवरण

  • Sanjay Prakash and Others vs Union of India and Others (Diary No. 29938/2026)
  • Bibhor Kumar Singh (Shaurya Chakra) and Others vs Union of India and Others [W.P.(C) No. 873/2026]

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान, अरविंद दातार, एस. गुरुकृष्ण कुमार सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। विभिन्न CAPF अधिकारियों की ओर से याचिकाएं एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड पी.एन. पुरी के माध्यम से दायर की गई हैं।

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