कलकत्ता हाईकोर्ट : SSB कांस्टेबल की बर्खास्तगी रद्द, सेवा बहाली का आदेश
कोलकाता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने सशस्त्र सीमा बल (SSB) के एक कांस्टेबल को बड़ी राहत देते हुए उसकी बर्खास्तगी को अवैध करार दिया है। अदालत ने आदेश दिया कि कांस्टेबल को सेवा में लगातार कार्यरत माना जाए और उसे सभी सेवा लाभ बहाल किए जाएं।
न्यायमूर्ति अनिरुद्ध रॉय की एकल पीठ ने कहा कि विभाग ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) नियम, 1955 के नियम 29(d) का गलत इस्तेमाल करते हुए पहले से दी गई सजा को रद्द कर कांस्टेबल की सेवा समाप्त की, जबकि ऐसा करने का अधिकार विभाग को नहीं था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि नियम 29 के तहत पुनरीक्षण (Revision) की शक्ति तभी इस्तेमाल की जा सकती है, जब बल का कोई सदस्य अपील खारिज होने के बाद स्वयं पुनरीक्षण याचिका दायर करे। विभाग अपने स्तर पर स्वतः (Suo Motu) इस शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकता।
क्या है मामला?
याचिकाकर्ता मुकेश कुमार पांडे की नियुक्ति वर्ष 2006 में SSB में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) के पद पर हुई थी। सेवा सत्यापन के दौरान पता चला कि उन्होंने भर्ती के समय अपने खिलाफ लंबित एक आपराधिक मामले की जानकारी सत्यापन फॉर्म में नहीं दी थी।
इसके बाद विभागीय जांच हुई और वर्ष 2013 में आरोप सिद्ध पाए जाने पर अनुशासनिक प्राधिकारी ने नरम रुख अपनाते हुए सात दिन के वेतन की कटौती की सजा दी। आदेश में कहा गया था कि याचिकाकर्ता युवा था और संभव है कि डर या अनजाने में उसने यह जानकारी छिपाई हो।
हालांकि, वर्ष 2017 में SSB मुख्यालय ने इस सजा को अत्यधिक हल्का माना और कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि छिपाकर प्राप्त की गई नियुक्ति शुरू से ही अमान्य है। इसके बाद उप महानिरीक्षक (DIG) ने CRPF नियम 29(d) का हवाला देते हुए पहले की सजा को रद्द कर दिया और अंततः अक्टूबर 2019 में मुकेश कुमार पांडे की सेवाएं समाप्त कर दीं। विभागीय अपीलों में भी बर्खास्तगी को बरकरार रखा गया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि नियम 29(d) कोई स्वतंत्र प्रावधान नहीं है और इसे नियम 29(a) से अलग करके लागू नहीं किया जा सकता। चूंकि याचिकाकर्ता ने कोई पुनरीक्षण याचिका दाखिल नहीं की थी, इसलिए वरिष्ठ अधिकारी के पास पुनरीक्षण शक्ति का प्रयोग करने का कोई अधिकार नहीं था।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि कोई प्रशासनिक कार्रवाई कानून के विपरीत और अधिकार क्षेत्र से बाहर हो, तो उसे वैध ठहराने के लिए ‘वेवर’, ‘एक्वायसेंस’ या ‘एस्टॉपल’ जैसे न्यायसंगत सिद्धांत लागू नहीं किए जा सकते।
सेवा बहाली का आदेश
हाईकोर्ट ने विभाग द्वारा पारित सभी संबंधित आदेशों को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि मुकेश कुमार पांडे को वर्ष 2013 में दी गई मामूली सजा के बाद से लगातार सेवा में माना जाए। उनकी नौकरी में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं माना जाएगा और उन्हें सभी सेवा संबंधी लाभ दिए जाएंगे

