गुवाहाटी हाईकोर्ट : ड्यूटी पर सोने और फायरिंग करने वाले BSF जवान की बहाली का आदेश रद्द कर बर्खास्तगी को रखा बरकरार
गुवाहाटी, 12 जून। अनुशासित बलों में कर्तव्य पालन की अहमियत को रेखांकित करते हुए Border Security Force (BSF) के एक जवान की बर्खास्तगी को Gauhati High Court ने सही ठहराया है। कोर्ट की डिवीजन बेंच ने ड्यूटी के दौरान पोस्ट पर सोने, साथी जवान पर राइफल तानने और फायरिंग करने के आरोपी कॉन्स्टेबल जीडी देबेन सिन्हा को सेवा में बहाल करने संबंधी सिंगल जज बेंच के आदेश को रद्द कर दिया है।
यह फैसला मुख्य न्यायाधीश Justice Ashutosh Kumar और Justice Arun Dev Choudhury की खंडपीठ ने 9 जून 2026 को भारत सरकार एवं अन्य बनाम कॉन्स्टेबल जीडी देबेन सिन्हा (WA/29/2026) मामले में सुनाया।
क्या था मामला?
मामला BSF की 98वीं बटालियन का है, जो जम्मू फ्रंटियर के पलोरा कैंपस में तैनात थी। आरोप के अनुसार, ‘सी’ कंपनी में तैनात कॉन्स्टेबल जीडी देबेन सिन्हा ड्यूटी के दौरान अपनी पोस्ट पर सोते हुए पाए गए थे। जब एक साथी जवान ने उन्हें जगाने का प्रयास किया तो उन्होंने गुस्से में अपनी INSAS राइफल कॉक कर फायरिंग कर दी। हालांकि गोली किसी को नहीं लगी, लेकिन घटना के बाद उन्हें तत्काल निहत्था कर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई।
समरी सिक्योरिटी फोर्स कोर्ट (SSFC) ने 24 जुलाई 2020 को उन्हें दोषी पाते हुए सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया था। बाद में उनकी वैधानिक अपील भी खारिज कर दी गई थी।
सिंगल बेंच ने दी थी राहत
बर्खास्तगी के खिलाफ जवान ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। 22 जुलाई 2025 को सिंगल जज बेंच ने यह कहते हुए बर्खास्तगी आदेश रद्द कर दिया था कि समरी कोर्ट की कार्यवाही में कमांडेंट ने पीठासीन अधिकारी और इंटरप्रेटर दोनों की भूमिका निभाई, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठता है। अदालत ने जवान की सेवा बहाली और बकाया वेतन देने का निर्देश दिया था।
डिवीजन बेंच ने पलटा फैसला
केंद्र सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता के.के. परासर की दलीलों को स्वीकार करते हुए डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया।
अदालत ने कहा कि BSF नियमावली, 1969 के नियम 134(2) के तहत समरी कोर्ट के पीठासीन अधिकारी को इंटरप्रेटर के रूप में कार्य करने की अनुमति है। इसलिए इसमें किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं है।
खंडपीठ ने यह भी कहा कि जवान ने पूरी सुनवाई और अपील प्रक्रिया के दौरान कभी इस व्यवस्था पर आपत्ति नहीं जताई। रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट है कि उसे आरोपों और उनके परिणामों की पूरी जानकारी दी गई थी तथा उसने स्वेच्छा से चार में से तीन आरोप स्वीकार किए थे। मामले में 13 गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए थे।
अनुशासित बलों में कर्तव्य उल्लंघन गंभीर अपराध
अपने फैसले में अदालत ने कहा कि BSF जैसे अनुशासित बल में ड्यूटी प्रोटोकॉल का उल्लंघन अत्यंत गंभीर मामला है। ड्यूटी के दौरान सोना और उसके बाद हथियार का दुरुपयोग करना बल की अनुशासन व्यवस्था के लिए खतरा है। ऐसे मामलों में समरी सिक्योरिटी फोर्स कोर्ट और अपीलीय प्राधिकारी के फैसलों में हस्तक्षेप उचित नहीं माना जा सकता।
अदालत के इस निर्णय के साथ ही BSF कमांडेंट द्वारा जारी बर्खास्तगी आदेश फिर से प्रभावी हो गया है।

