नीट परीक्षा -2026: सुरक्षा की कमान अब CRPF-CISF के हाथों में,551 शहरों तक गोपनीय सामग्री पहुंचाने की जिम्मेदारी
नई दिल्ली, 12 जून। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित होने वाली नीट-2026 परीक्षा की गोपनीय सामग्री के सुरक्षित परिवहन की जिम्मेदारी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को सौंपी गई है। दोनों केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल देश के 551 शहरों तक प्रश्नपत्रों और अन्य गोपनीय परीक्षा सामग्री को लीक-प्रूफ तरीके से पहुंचाने का कार्य करेंगे।
गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, परीक्षा सामग्री को हैदराबाद और अहमदाबाद स्थित ओरिजिन हब से देशभर के विभिन्न हब शहरों तक ‘हब-एंड-स्पोक’ नेटवर्क के माध्यम से पहुंचाया जाएगा। इस प्रक्रिया में हवाई और सड़क दोनों माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। विशेष बात यह है कि जिन विमान या हेलीकॉप्टरों से प्रश्नपत्रों का परिवहन होगा, उनमें सीआरपीएफ और सीआईएसएफ के नामित जवान भी सामग्री के साथ मौजूद रहेंगे।
सूत्रों के अनुसार, नीट की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है। परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए दो-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत ओरिजिन हब, लेग-1, लेग-2 और लेग-3 हब, एयरपोर्ट, हेलीपैड तथा अन्य संवेदनशील स्थानों पर CAPF कर्मियों की तैनाती की जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत सीआरपीएफ और सीआईएसएफ को विमान और हेलीकॉप्टर से होने वाली आवाजाही में भी शामिल किया गया है। हालांकि भारतीय वायु सेना की सलाह के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात जवानों को विमान में चढ़ने से पहले अपने सर्विस हथियार जमा कराने होंगे, जिन्हें गंतव्य स्थल पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत वापस किया जाएगा।
इस पूरे अभियान के समन्वय के लिए सीआरपीएफ और सीआईएसएफ मुख्यालय में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है। वहीं, एनटीए की ओर से निदेशक आशीष गुप्ता को समन्वय के लिए संपर्क अधिकारी नामित किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, प्रश्नपत्रों के परिवहन हेतु CAPF कर्मियों की तैनाती 11 जून से 19 जून तक रहेगी। इसके बाद 21 जून की शाम से ओएमआर शीट और परीक्षा से संबंधित अन्य सामग्रियों की वापसी (रिवर्स लॉजिस्टिक्स) प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें भी केंद्रीय बलों की सुरक्षा व्यवस्था जारी रहेगी।
परीक्षा की निष्पक्षता और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए पहली बार इतने बड़े स्तर पर सीआरपीएफ और सीआईएसएफ को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की उम्मीद जताई जा रही है।

