झारखंड हाईकोर्ट : CRPF जवान की बर्खास्तगी रद्द, ‘अनिवार्य सेवानिवृत्ति’ की सजा बहाल
झारखंड हाईकोर्ट ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक कांस्टेबल को बड़ी राहत देते हुए सेवा से बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने पहले दी गई अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सजा को बहाल करते हुए कहा कि किसी कर्मचारी को दी जाने वाली सजा उसके दुराचार की गंभीरता के अनुसार तय होनी चाहिए, न कि उसके परिणामों के आधार पर।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की एकल पीठ में हुई। याचिकाकर्ता CRPF का कांस्टेबल था, जिस पर नियुक्ति के समय अपनी वैवाहिक स्थिति तथा पत्नी से जुड़े एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था।
विभागीय जांच के बाद जवान को अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सजा दी गई थी। हालांकि, जवान द्वारा दायर अपील पर अपीलीय प्राधिकारी ने राहत देने के बजाय सजा को और कठोर बनाते हुए उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया। इस निर्णय के चलते जवान के सभी सेवानिवृत्ति लाभ भी समाप्त हो गए थे।
हाईकोर्ट ने अपने 15 अप्रैल के आदेश में कहा कि अपीलीय प्राधिकारी का यह तर्क स्वीकार्य नहीं है कि कर्मचारी ने 10 वर्ष की सेवा पूरी नहीं की थी, इसलिए अनिवार्य सेवानिवृत्ति को बर्खास्तगी में बदला जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा निर्णय कानून की दृष्टि से टिकाऊ नहीं है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति और सेवा से बर्खास्तगी दो अलग-अलग दंड हैं। अनिवार्य सेवानिवृत्ति की स्थिति में कर्मचारी को कुछ सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त होते हैं, जबकि बर्खास्तगी की सजा में सभी लाभ समाप्त हो जाते हैं।
अंततः हाईकोर्ट ने अपीलीय और पुनरीक्षण प्राधिकारियों के आदेशों को निरस्त करते हुए मूल दंड — अनिवार्य सेवानिवृत्ति — को पुनः बहाल कर दिया, जिससे संबंधित CRPF जवान को बड़ी राहत मिली है।

