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CAPF Bill 2026: शशि थरूर ने गृह मंत्री अमित शाह को लिखी चिट्ठी, नए CAPF बिल पर जताई आपत्ति

नई दिल्ली: संसद में पेश होने जा रहे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) से जुड़े नए विधेयक को लेकर सियासी और संस्थागत स्तर पर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah को पत्र लिखकर CAPF जवानों और अधिकारियों की गंभीर चिंताओं को सामने रखा है।

थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी चिट्ठी साझा करते हुए बताया कि यह पत्र उन्हें ‘ऑल एक्स-पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन’ (AAPWA) की ओर से प्राप्त मांगों के आधार पर लिखा गया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप

पत्र में Supreme Court of India के 23 मई 2025 के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि CAPF के कार्यकारी कैडर को ‘ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस’ का दर्जा दिया गया था। साथ ही कोर्ट ने IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को IG रैंक तक चरणबद्ध तरीके से कम करने के निर्देश दिए थे।
थरूर ने आरोप लगाया कि इन निर्देशों को अब तक लागू नहीं किया गया है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है और अवमानना याचिका तक दायर हो चुकी है।

प्रमोशन में भारी ठहराव

चिट्ठी में प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। CRPF और BSF के 2008 बैच के असिस्टेंट कमांडेंट 15 साल से अधिक सेवा के बावजूद अभी तक डिप्टी कमांडेंट नहीं बन पाए हैं।
इसके विपरीत, उनसे जूनियर IPS अधिकारियों को CAPF में वरिष्ठ पदों पर तैनात किया जा रहा है, जिससे कैडर के भीतर निराशा और असंतुलन पैदा हो रहा है।

नए CAPF बिल 2026 पर आपत्ति

थरूर ने नए CAPF बिल 2026 को लेकर आशंका जताई है कि यह विधेयक वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को स्थायी रूप दे सकता है। उन्होंने कहा कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत होगा, जिसमें इस व्यवस्था को तर्कसंगत बनाने और कम करने की बात कही गई थी।

फील्ड अनुभव वाले नेतृत्व की मांग

पत्र में जोर देकर कहा गया है कि CAPF जैसे बलों में नेतृत्व उन अधिकारियों के हाथ में होना चाहिए, जिनके पास फील्ड और ग्राउंड का वास्तविक अनुभव हो। बाहरी अधिकारियों पर अधिक निर्भरता से बलों के तालमेल और दीर्घकालिक विकास पर असर पड़ सकता है।

प्रमुख मांगें

थरूर ने गृह मंत्री से कई अहम कदम उठाने की मांग की है:

  • CAPF बिल को मौजूदा सत्र में जल्दबाजी में पास न किया जाए
  • इसे विस्तृत चर्चा के लिए संसदीय स्थायी समिति को भेजा जाए
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए स्पष्ट और समयबद्ध रोडमैप जारी किया जाए
  • सैनिक कल्याण बोर्ड की तर्ज पर CAPF वेलफेयर बोर्ड का गठन किया जाए
  • AAPWA प्रतिनिधिमंडल को गृह मंत्री से मिलने का समय दिया जाए

बढ़ सकता है राजनीतिक और संस्थागत टकराव

CAPF बिल 2026 को लेकर उठी ये आवाजें आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर बहस को और तेज कर सकती हैं। एक ओर सरकार प्रशासनिक सुधार और एकरूपता की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर जवानों और पूर्व कर्मियों की चिंताओं ने इस मुद्दे को संवेदनशील बना दिया है।

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