CISF जवानों को बड़ी राहत: दिल्ली हाईकोर्ट ने HRA से जुड़े 1 अगस्त के आदेश पर लगाई रोक
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने CISF कर्मियों को बड़ी अंतरिम राहत देते हुए 1 अगस्त 2026 को जारी विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। इस आदेश के तहत परिसर से बाहर परिवार के साथ रह रहे जवानों को या तो बैचलर बैरक/कैंप में रहने या फिर पूर्ण मकान किराया भत्ता (HRA) के शेष 5 प्रतिशत हिस्से पर भविष्य में दावा नहीं करने का अंडरटेकिंग देने के लिए कहा गया था।
45 प्रतिशत वरिष्ठता को लेकर था विवाद
मामले की जड़ CISF आवास नीति में निर्धारित 45 प्रतिशत वरिष्ठता कोटा से जुड़ी है। परिसर से बाहर परिवार के साथ रह रहे कुछ CISF कर्मियों को इस मानदंड को पूरा नहीं करने के आधार पर पूर्ण HRA के बजाय 5 प्रतिशत कम HRA दिया जा रहा था। इसे एक अंतरिम वित्तीय व्यवस्था के तौर पर देखा गया था।
हालांकि, 1 अगस्त 2026 के आदेश में ऐसे कर्मियों के लिए दो विकल्प रखे गए। उन्हें या तो बैचलर बैरक/कैंप में स्थानांतरित होने या यह लिखित वचन देने को कहा गया कि वे भविष्य में शेष 5 प्रतिशत अथवा पूर्ण HRA के भुगतान का दावा नहीं करेंगे।
जवानों ने हाईकोर्ट का रुख किया
जवानों की ओर से दलील दी गई कि इस व्यवस्था के जरिए उन्हें परिवार के साथ बाहर रहने के विकल्प से वंचित किया जा रहा है और साथ ही उनके HRA संबंधी संभावित कानूनी अधिकार को छोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
याचिकाओं में मनीषा कुमारी, सुनील, मनीष कुमार सिंह, कुमारी रश्मी गुरुंग और अनुजा महापात्रा सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने राहत की मांग की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता पी. सुरेशन ने पक्ष रखा।
कोर्ट ने 1 अगस्त के आदेश पर लगाई रोक
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति अमित शर्मा की खंडपीठ ने की। अदालत ने प्रथम दृष्टया नीति के क्रियान्वयन में भेदभाव की संभावना पर गौर करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया और चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
अंतरिम राहत के तौर पर खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया कि 1 अगस्त 2026 के विवादित आदेश को फिलहाल प्रभावी न किया जाए।
पहले भी HRA को लेकर फैसला दे चुका है हाईकोर्ट
इस विवाद में आनंद कुमार बनाम भारत संघ (2017) मामले का भी उल्लेख किया गया। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने CISF कर्मियों के HRA अधिकारों से जुड़े मुद्दे पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि केवल 45 प्रतिशत वरिष्ठता मानदंड के आधार पर परिसर से बाहर परिवार के साथ रहने वाले कर्मियों के HRA अधिकारों को समाप्त नहीं किया जा सकता।
15 अक्टूबर को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल याचिकाकर्ता CISF जवानों पर 1 अगस्त के आदेश के आधार पर बैचलर बैरक में जाने या HRA के शेष हिस्से पर दावा छोड़ने का अंडरटेकिंग देने का दबाव नहीं बनाया जा सकेगा।
मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। हालांकि, अंतिम राहत और नीति की वैधता पर फैसला आगे की सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद होगा।

