NEWS OF PARAMILITARY (CAPF)

देशभक्ति और सूचना का सशक्त मंच

NEWS OF PARAMILITARY (CAPF)

देशभक्ति और सूचना का सशक्त मंच

BSF NEWSCAPF कोर्ट केस अपडेट्स

BSF जवान की दाढ़ी रखने की अनुमति वापस लेने के बाद VRS से जुड़े मामले में जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका ,कहा- उचित अदालत जाएं

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने दाढ़ी रखने की अनुमति वापस लिए जाने के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने वाले सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक जवान की याचिका को क्षेत्राधिकार के अभाव में खारिज कर दिया है। हालांकि, अदालत ने मामले के मूल विवाद यानी दाढ़ी रखने की अनुमति वापस लिए जाने या जवान को सेवानिवृत्ति के लिए मजबूर किए जाने के आरोपों पर कोई फैसला नहीं दिया है।

न्यायमूर्ति राजनेश ओसवाल की पीठ खुरशीद अहमद खान की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में जवान ने 16 जून 2023 को उसकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति स्वीकार करने और उसी दिन उसे यूनिट की सेवा से हटाने के आदेश को चुनौती दी थी।

मामला वर्ष 2018 से जुड़ा है, जब खान को neatly trimmed दाढ़ी रखने की अनुमति दी गई थी। BSF के अनुसार यह अनुमति दाढ़ी को साफ-सुथरा और निर्धारित तरीके से trimmed रखने की शर्त पर थी। BSF का कहना था कि 16 जून 2023 को जवान लंबी और खुली दाढ़ी में पाया गया तथा दाढ़ी trim करने से इनकार करने पर उसकी अनुमति वापस ले ली गई।

जवान के अनुसार, दाढ़ी रखने की अनुमति अचानक वापस लिए जाने के बाद उसने उसी दिन स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया। उसका दावा था कि बाद में उसने सेवानिवृत्ति का आवेदन वापस लेने की कोशिश भी की, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। दूसरी ओर, BSF ने अदालत में कहा कि जवान ने स्वयं VRS की इच्छा जताई थी और अधिकारियों के सामने उसने किसी दबाव या मजबूरी में निर्णय लेने से इनकार किया था।

अदालत ने क्यों खारिज की याचिका?

BSF की ओर से याचिका पर क्षेत्राधिकार को लेकर प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई। बताया गया कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन 50वीं बटालियन BSF, तुरा, मेघालय में दिया गया था और संबंधित कमांडेंट ने वहीं इसे स्वीकार किया था।

हाई कोर्ट ने पाया कि मामले से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण या आवश्यक हिस्सा जम्मू-कश्मीर में नहीं हुआ। अदालत ने यह भी कहा कि केवल BSF कश्मीर के IG को प्रतिवादी बनाए जाने से जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट को मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं मिल जाता। संबंधित अधिकारी का इस विवाद से आवश्यक संबंध नहीं था।

अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत क्षेत्राधिकार से जुड़े सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल तभी किसी हाई कोर्ट को अधिकार मिलता है जब cause of action का कोई material, integral या essential हिस्सा उसके क्षेत्र में उत्पन्न हुआ हो।

दाढ़ी विवाद पर फैसला नहीं

इस मामले में हाई कोर्ट ने यह तय नहीं किया कि BSF द्वारा दाढ़ी रखने की अनुमति वापस लेना कानूनी था या नहीं। अदालत ने यह भी तय नहीं किया कि जवान को वास्तव में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के लिए मजबूर किया गया था या उसकी VRS वैध थी।

याचिका को क्षेत्राधिकार के अभाव में खारिज करते हुए अदालत ने जवान को अपनी शिकायत के निवारण के लिए उचित क्षेत्राधिकार वाली अदालत का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी है।

Spread the love

Editorial Desk – News of Paramilitary

Editorial Desk, News of Paramilitary, covers verified news, policy updates and field reports related to India’s Paramilitary Forces. Content is published following strict editorial standards.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page