CAPF में छुट्टी का इनकार: जवानों के तनाव का बड़ा कारण, व्यवस्था में बदलाव की जरूरत
नई दिल्ली: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के जवान देश की आंतरिक सुरक्षा, सीमा सुरक्षा और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करते हैं। सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी और अन्य बलों के जवानों को लंबे समय तक परिवार से दूर रहना पड़ता है। ऐसे में छुट्टी केवल आराम का माध्यम नहीं, बल्कि जवानों के मानसिक संतुलन और पारिवारिक जीवन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
हालांकि, कई बार छुट्टी समय पर स्वीकृत नहीं हो पाने से जवानों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव बन जाता है। परिवार में बीमारी, शादी, किसी आपात स्थिति या त्योहार के मौके पर छुट्टी नहीं मिलना तनाव को और बढ़ा सकता है।
छुट्टी और जवानों पर बढ़ता दबाव
CAPF जवानों को निर्धारित नियमों के तहत अर्जित अवकाश (Earned Leave) और आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) की सुविधा मिलती है। लेकिन जमीनी स्तर पर जवानों को छुट्टी लेने में कई व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बटालियनों में बड़ी संख्या में रिक्त पद, लगातार ऑपरेशनल ड्यूटी, प्रशिक्षण, कोर्स, खेल प्रतियोगिताएं और अतिरिक्त तैनाती जैसी परिस्थितियों में छुट्टी मंजूर करना कमांडरों के लिए भी चुनौती बन जाता है। इसका सीधा असर जवानों के पारिवारिक जीवन और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
फ्रेट्रिसाइड से भी जुड़ा है तनाव
पूर्व सीआरपीएफ महानिरीक्षक एम.पी. नाथानेल ने द ट्रिब्यून में प्रकाशित अपने लेख में छुट्टी से जुड़ी समस्याओं को CAPF में तनाव और फ्रेट्रिसाइड यानी सहकर्मियों पर गोली चलाने जैसी घटनाओं के संभावित महत्वपूर्ण ट्रिगर्स में शामिल किया है।
पिछले कुछ वर्षों में CAPF में आत्महत्या और फ्रेट्रिसाइड की घटनाओं ने बलों के भीतर मानसिक तनाव को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है। परिवार से लंबे समय तक दूरी, काम का दबाव, छुट्टी में कठिनाई, पारिवारिक समस्याएं, प्रमोशन से जुड़ी निराशा और लगातार तनाव कई कारकों के रूप में सामने आते रहे हैं।
सरकार भी मान चुकी है परिवार के साथ समय की जरूरत
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी जवानों को पर्याप्त समय परिवार के साथ बिताने का अवसर देने की जरूरत पर जोर दिया है। सरकार का लक्ष्य रहा है कि जवानों को साल में पर्याप्त संख्या में ऐसे दिन मिलें, जब वे अपने परिवार के साथ रह सकें।
लेकिन कई बलों में जवानों की कमी और लगातार बढ़ती परिचालन जिम्मेदारियों के कारण इस लक्ष्य को पूरी तरह हासिल करना अभी भी चुनौती बना हुआ है।
क्या हो सकता है समाधान?
इस समस्या से निपटने के लिए केवल छुट्टी के नियम बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू करना भी जरूरी है।
1. रिक्त पदों को जल्द भरा जाए
बटालियनों में स्वीकृत पदों के मुकाबले मौजूद जवानों की संख्या कम होने पर ड्यूटी का भार बढ़ता है। भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया को तेज कर रिक्तियों को कम किया जा सकता है।
2. छुट्टी व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए
छुट्टी की प्राथमिकता, लंबित आवेदन और स्वीकृति की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। आपातकालीन परिस्थितियों के लिए अलग और तेज व्यवस्था होनी चाहिए।
3. मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए
जवानों में तनाव के शुरुआती संकेतों की पहचान के लिए काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत है।
4. परिवार से संपर्क के अवसर बढ़ाए जाएं
लंबी तैनाती वाले क्षेत्रों में जवानों को परिवार से नियमित वीडियो कॉल और अन्य माध्यमों से संपर्क की बेहतर सुविधा मिलनी चाहिए।
5. कमांड स्तर पर संवेदनशीलता बढ़े
छुट्टी मांगने वाले जवान को केवल प्रशासनिक समस्या के रूप में देखने के बजाय उसकी पारिवारिक और मानसिक स्थिति को भी समझना जरूरी है।
जवानों की सुरक्षा केवल हथियारों से नहीं
CAPF जवान देश की सुरक्षा के लिए कठिन से कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करते हैं। उनकी सुरक्षा का अर्थ केवल ऑपरेशन के दौरान उनकी शारीरिक सुरक्षा सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक जीवन और भावनात्मक जरूरतों का ध्यान रखना भी है।
छुट्टी का बेहतर प्रबंधन जवानों के तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे न केवल आत्महत्या और फ्रेट्रिसाइड जैसी गंभीर घटनाओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है, बल्कि बलों की कार्यक्षमता, अनुशासन और मनोबल भी मजबूत होगा।
CAPF में छुट्टी को केवल प्रशासनिक सुविधा नहीं, बल्कि जवानों के कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय मानकर नीतिगत स्तर पर गंभीरता से देखने की जरूरत है।
नोट: यह लेख उपलब्ध रिपोर्टों, विशेषज्ञ राय और सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया विश्लेषणात्मक समाचार लेख है।

