137 दिन ड्यूटी से गैरहाजिर रहने पर बर्खास्त CISF जवान को पटना हाईकोर्ट से बड़ी राहत, बहाली के आदेश
पटना: Patna High Court ने बिना पूर्व सूचना के 137 दिनों तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के आरोप में बर्खास्त किए गए Central Industrial Security Force (सीआईएसएफ) के एक जवान को बड़ी राहत दी है। अदालत ने बर्खास्तगी से जुड़े सभी आदेश रद्द करते हुए सीआईएसएफ अधिकारियों को दो महीने के भीतर जवान को दोबारा सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुपस्थिति की अवधि का वेतन और अन्य वित्तीय लाभ जवान को नहीं मिलेगा।
बीमारी के कारण नहीं लौट सके ड्यूटी
मामला मधुबनी निवासी नवनीत कुमार यादव से जुड़ा है, जिन्हें 21 मार्च 2017 को सीआईएसएफ में नियुक्त किया गया था। उन्होंने ओडिशा के मुंडाली स्थित रीजनल ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण के बाद भिलाई स्थित आरटीसी में अपनी सेवाएं दीं।
अक्टूबर 2018 में एक सप्ताह की छुट्टी पर घर आने के बाद वह निर्धारित समय पर ड्यूटी पर वापस नहीं लौट सके। उन्होंने अदालत को बताया कि गंभीर बीमारी के कारण उनकी तबीयत लगातार खराब रही और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह पर इलाज चलता रहा। इसके समर्थन में उन्होंने Darbhanga Medical College and Hospital तथा एक सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल रिकॉर्ड भी अदालत में पेश किए।
मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर मिला राहत
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत चिकित्सीय दस्तावेजों और परिस्थितियों का विस्तार से परीक्षण किया। इसके बाद न्यायमूर्ति Harish Kumar की एकलपीठ ने बर्खास्तगी से संबंधित सभी आदेशों को निरस्त करते हुए जवान को पुनः सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया।
वेतन नहीं मिलेगा, अवकाश में समायोजित होगी अनुपस्थिति
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि 137 दिनों की अनुपस्थिति की अवधि का वेतन या अन्य वित्तीय लाभ जवान को नहीं दिया जाएगा। यह अवधि उसके उपलब्ध अवकाश के विरुद्ध समायोजित की जाएगी। यानी जवान की नौकरी तो बहाल होगी, लेकिन गैरहाजिरी के दौरान का आर्थिक लाभ उसे प्राप्त नहीं होगा।
दो महीने में बहाली का निर्देश
हाईकोर्ट ने सीआईएसएफ अधिकारियों को आदेश दिया है कि दो महीने के भीतर नवनीत कुमार यादव को सेवा में वापस लिया जाए। अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि सेवा नियमों और अनुशासन का पालन आवश्यक है, लेकिन वास्तविक परिस्थितियों और उपलब्ध चिकित्सा साक्ष्यों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए बहाली का आदेश दिया गया, जबकि अनुपस्थिति अवधि के वेतन और अन्य लाभ देने से इनकार कर दिया गया।

