NEWS OF PARAMILITARY (CAPF)

देशभक्ति और सूचना का सशक्त मंच

NEWS OF PARAMILITARY (CAPF)

देशभक्ति और सूचना का सशक्त मंच

CAPF NEWSCAPF कोर्ट केस अपडेट्स

CAPF जवानों के हक में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: सेवा समाप्ति के मामलों पर अब दिल्ली हाईकोर्ट में भी हो सकेगी सुनवाई

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के जवानों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि बीएसएफ सहित सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कर्मी अपनी सेवा समाप्ति या अन्य सेवा संबंधी विवादों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं, भले ही मामला या घटना दिल्ली से बाहर की हो।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने यह फैसला एक बीएसएफ कांस्टेबल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने कांस्टेबल की याचिका को बहाल करते हुए कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट को ऐसे मामलों की सुनवाई का अधिकार प्राप्त है क्योंकि बीएसएफ के महानिदेशक और गृह मंत्रालय के कार्यालय दिल्ली में स्थित हैं।

दूसरी शादी के आरोप में हुई थी बर्खास्तगी

मामला एक बीएसएफ कांस्टेबल से जुड़ा है, जिसे पहली पत्नी की अनुमति के बिना दूसरी शादी करने के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में तैनात इस जवान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन वह निर्धारित समय के भीतर जवाब नहीं दे सका। इसके बाद वर्ष 2022 में कमांडेंट ने उसे बिना किसी पेंशन लाभ के सेवा से हटा दिया।

कांस्टेबल ने पहले विभागीय अपील की, लेकिन उसे भी खारिज कर दिया गया। इसके बाद उसने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सेवा में बहाली की मांग की।

दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका की थी खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘फोरम नॉन कन्वीनियंस’ (असुविधाजनक मंच) के सिद्धांत का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट का मानना था कि मामला पश्चिम बंगाल से संबंधित है, इसलिए दिल्ली इस विवाद की सुनवाई के लिए उपयुक्त मंच नहीं है।

हालांकि, याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि बीएसएफ के महानिदेशक और गृह मंत्रालय के कार्यालय दिल्ली में होने के कारण दिल्ली हाईकोर्ट को मामले की सुनवाई का अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि किसी सीएपीएफ कर्मी को सेवा समाप्ति जैसे प्रशासनिक आदेश से प्रभावित किया जाता है, तो वह दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सकता है, भले ही आदेश किसी अन्य राज्य में जारी हुआ हो या उससे जुड़ी घटनाएं दिल्ली के बाहर हुई हों।

पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226(1) के तहत भारत संघ और संबंधित बलों के शीर्ष अधिकारियों के कार्यालय दिल्ली में स्थित होने के कारण दिल्ली हाईकोर्ट को ऐसे मामलों में क्षेत्राधिकार प्राप्त है।

फोरम नॉन कन्वीनियंस’ सिद्धांत का गलत इस्तेमाल

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘फोरम नॉन कन्वीनियंस’ के सिद्धांत का गलत उपयोग किया। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, जब किसी नागरिक या कर्मचारी के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर की जाती है, तब इस सिद्धांत को बहुत सीमित परिस्थितियों में ही लागू किया जा सकता है

CAPF कर्मियों के लिए महत्वपूर्ण फैसला

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और एसएसबी सहित सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लाखों कर्मियों के लिए राहत भरा है। अब सेवा संबंधी विवादों में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट में न्याय पाने का स्पष्ट अधिकार मिलेगा, जिससे कानूनी प्रक्रिया अधिक सुलभ हो सकेगी।

Spread the love

Editorial Desk – News of Paramilitary

Editorial Desk, News of Paramilitary, covers verified news, policy updates and field reports related to India’s Paramilitary Forces. Content is published following strict editorial standards.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page