19 साल बाद दिवंगत CISF जवान की पत्नी को मिला न्याय, दिल्ली हाईकोर्ट ने पेंशन और 9% ब्याज देने का दिया आदेश
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने CISF के दिवंगत जवान की पत्नी को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को लंबित पेंशन लाभ तत्काल जारी करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि केवल नाम की स्पेलिंग में छोटी सी गलती के कारण एक निरक्षर विधवा को लगभग दो दशकों तक उसके वैधानिक अधिकारों से वंचित रखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका (W.P.(C) 3306/2026) में याचिकाकर्ता वेदो देवी ने बताया कि उनके पति स्वर्गीय लक्ष्मण सिंह, जो CISF में कार्यरत थे, का 5 जनवरी 2007 को निधन हो गया था। इसके बावजूद उन्हें अब तक पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ नहीं मिल सके।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि विभागीय स्तर पर दो बार सत्यापन होने के बावजूद बैंक द्वारा मृतक कर्मचारी की पत्नी के नाम की स्पेलिंग को लेकर आपत्ति उठाई जाती रही। कहीं नाम ‘वेदो देवी’ तो कहीं ‘विद्या देवी’ दर्ज होने के कारण भुगतान रोक दिया गया।
न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की खंडपीठ ने मामले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, जहां मामूली तकनीकी त्रुटि के कारण एक विधवा को 19 वर्षों तक न्याय के लिए भटकना पड़ा।
अदालत ने केंद्र सरकार, CISF और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को एक महीने के भीतर पूरी पेंशन राशि, पिछले 19 वर्षों के एरियर सहित, 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान किया जाए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि आदेश का पालन न होने पर सख्त रुख अपनाया जाएगा।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि तय समय सीमा में आदेश का अनुपालन नहीं होता है तो याचिकाकर्ता पुनः याचिका बहाल करने के लिए स्वतंत्र होंगी।

