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BSF जवान की ‘डेड वुड’ शादी पर झारखंड हाईकोर्ट का सख्त रुख, पत्नी-बेटी को ₹35,000 मासिक भरण-पोषण का आदेश

झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम वैवाहिक विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि जब शादी पूरी तरह टूट चुकी हो और लंबे समय से पति-पत्नी अलग रह रहे हों, तो ऐसे रिश्ते को जबरन बनाए रखना व्यर्थ है। कोर्ट ने ऐसी शादी को “डेड वुड मैरिज” बताते हुए तलाक की डिक्री को बरकरार रखा और BSF कांस्टेबल पति को पत्नी व नाबालिग बेटी को ₹35,000 प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश दिया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला सुषमा देवी बनाम राज कुमार प्रसाद से जुड़ा है। दोनों की शादी वर्ष 2008 में हुई थी और उनसे एक बेटी है। वर्ष 2014 के बाद से पति-पत्नी अलग रह रहे थे। बाद में पति ने दूसरी शादी भी कर ली। फैमिली कोर्ट, धनबाद ने पति के पक्ष में तलाक की डिक्री दी थी, जिसे पत्नी ने झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि:

“ऐसी शादी, जिसमें भावनात्मक जुड़ाव समाप्त हो चुका हो और पुनर्मिलन की कोई संभावना न हो, उसे जबरन बनाए रखना केवल पीड़ा बढ़ाता है।”

कोर्ट ने इसे ‘डेड वुड’ यानी निष्प्राण विवाह करार देते हुए कहा कि ऐसे रिश्ते को आगे खींचने का कोई औचित्य नहीं है।

BSF कांस्टेबल की सैलरी और जिम्मेदारियां

कोर्ट के समक्ष दाखिल हलफनामे में पति ने बताया कि वह सीमा सुरक्षा बल (BSF) में कांस्टेबल है और उसकी सकल मासिक आय लगभग ₹86,706 है। उसने अपने बीमार पिता, अलग रह रही बहन और दूसरी शादी से बने परिवार की जिम्मेदारियों का हवाला भी दिया।

भरण-पोषण पर कोर्ट का आदेश

हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत भरण-पोषण तय करते हुए कहा:

  • पत्नी को: ₹25,000 प्रति माह
  • नाबालिग बेटी को: ₹10,000 प्रति माह
    👉 कुल ₹35,000 प्रतिमाह, जो हर दो साल में 5% बढ़ेगा

भरण-पोषण की शर्तें

  • राशि हर महीने की 10 तारीख तक पत्नी के खाते में जमा करनी होगी
  • बेटी के 18 वर्ष की होने तक भरण-पोषण जारी रहेगा
  • बेटी के बालिग होने के बाद राशि सीधे उसके बैंक खाते में जमा की जाएगी

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तलाक के बावजूद पत्नी और बच्चों की आर्थिक सुरक्षा सर्वोपरि है।

📌 केस विवरण:
मुकदमा: सुषमा देवी बनाम राज कुमार प्रसाद (F.A. No. 324 of 2023)
कोर्ट: झारखंड हाईकोर्ट, रांची
निर्णय: जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने फैसला सुनाया।

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