सुप्रीम कोर्ट ने CAPF में IPS डेप्युटेशन से जुड़े अवमानना मामले की लिस्टिंग पर जताई नाराजगी, 15 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
नई दिल्ली, 30 सितंबर। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में IPS अधिकारियों की डेप्युटेशन से जुड़े अवमानना मामले की लिस्टिंग के तरीके पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को मामले को दूसरी बेंच के सामने लिस्ट किए जाने की जानकारी दी जानी चाहिए थी।
मामला पहले जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एएस चंदुरकर की नियमित बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। मंगलवार को इसे कॉज लिस्ट से हटाकर बुधवार को जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की विशेष बेंच के सामने सूचीबद्ध किया गया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि एक बार कॉज लिस्ट जारी होने के बाद सूचीबद्ध मामले को बिना उचित सूचना के हटाना उचित नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता गुरु कृष्ण कुमार ने भी कहा कि 22 सितंबर की सुनवाई के दौरान मामले को संबंधित रिट याचिकाओं के साथ जोड़ने की कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
रजिस्ट्री की रिपोर्ट पर कोर्ट ने की टिप्पणी
बेंच ने रजिस्ट्री की ओर से दाखिल रिपोर्ट देखी। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र की ओर से दोनों मामलों में पेश वकीलों ने CJI के समक्ष अनुरोध किया था कि अवमानना याचिकाओं और CAPF एक्ट, 2026 को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं की सुनवाई एक ही बेंच के सामने की जाए।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि उन्होंने ही दोनों मामलों को साथ सुनने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि अवमानना मामले में केंद्र का प्रमुख बचाव 2026 के CAPF एक्ट से जुड़ा है, इसलिए दोनों मामलों को साथ सुना जाना चाहिए।
जस्टिस मनोज मिश्रा ने कहा कि दोनों मामलों को साथ सुनना उचित हो सकता है, लेकिन याचिकाकर्ताओं को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि उन्हें भी मंगलवार रात करीब 9 बजे ही विशेष बेंच बनाए जाने की जानकारी मिली थी। एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने इस पर माफी मांगी। बाद में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी माफी मांगी।
क्या 2025 के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश CAPF एक्ट से प्रभावित हुए?
सुनवाई का मुख्य मुद्दा यह भी रहा कि 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में दिए गए कौन से निर्देश 2026 के CAPF एक्ट से स्वतंत्र हैं और क्या उन निर्देशों का पालन हुआ है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से श्याम दीवान ने कहा कि कैडर रिव्यू सहित कुछ निर्देश ऐसे हैं जिनका CAPF एक्ट से सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि 2025 के फैसले में कैडर रिव्यू के लिए छह महीने की समयसीमा निर्धारित की गई थी और इसका पालन अलग से जांचा जाना चाहिए।
वहीं, केंद्र की ओर से कहा गया कि CAPF एक्ट में डेप्युटेशन का प्रावधान मौजूद है और इसलिए इस मुद्दे को संबंधित रिट याचिकाओं से अलग नहीं किया जा सकता। केंद्र ने दोनों मामलों में अपने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
15 अक्टूबर को होगी सुनवाई
बेंच ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में यह देखा जाएगा कि 2025 के फैसले में दिए गए ऐसे कौन-कौन से निर्देश हैं जो 2026 के कानून से स्वतंत्र हैं और यदि ऐसे निर्देश हैं तो उनका पालन हुआ है या नहीं।
कोर्ट ने मामले को 15 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे CAPF एक्ट को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। रजिस्ट्री द्वारा लिस्टिंग को लेकर दी गई रिपोर्ट को सीलबंद कवर में रखने का भी निर्देश दिया गया है।
यह मामला Mahendra Singh Deo v. Govind Mohan & Others, Contempt Petition (C) No. 37/2026 in C.A. No. 13106/2024 है।
सितंबर में कोर्ट के समक्ष यह मुद्दा भी आया था कि 23 मई 2025 के फैसले के बाद 46 IPS अधिकारियों को पांच CAPFs में डेप्युटेशन पर भेजा गया। कोर्ट ने इस संबंध में गृह मंत्रालय और DoPT से जानकारी मांगी थी।

