सारंडा में नक्सलियों को CRPF की अंतिम चेतावनी: एक महीने में करें सरेंडर, नहीं तो होगी निर्णायक कार्रवाई
चाईबासा (झारखंड): झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नक्सल प्रभावित सारंडा क्षेत्र में सुरक्षा अभियान को तेज करते हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने नक्सलियों को सख्त संदेश दिया है। सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी दीपक कुमार ने नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए एक महीने की अंतिम समयसीमा देते हुए चेतावनी दी है कि तय अवधि के बाद सुरक्षा बल निर्णायक कार्रवाई करेंगे।
कैंप का दौरा कर जवानों का बढ़ाया मनोबल
शनिवार को स्पेशल डीजी दीपक कुमार ने बालिबा गांव स्थित सीआरपीएफ की 193वीं बटालियन कैंप का दौरा किया। उन्होंने वहां तैनात जवानों से मुलाकात कर उनका मनोबल बढ़ाया और क्षेत्र में चल रहे एंटी-नक्सल ऑपरेशनों की जमीनी स्थिति की समीक्षा की।
करीब दो घंटे तक चले निरीक्षण के दौरान उन्होंने सुरक्षा रणनीति, ऑपरेशनल चुनौतियों और जवानों की जरूरतों को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की।
नक्सलियों को अंतिम मौका
मीडिया से बातचीत में स्पेशल डीजी ने कहा कि सारंडा और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय नक्सलियों को आत्मसमर्पण का अंतिम अवसर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि एक महीने के भीतर सरेंडर नहीं किया गया, तो सुरक्षा बल कठोर और निर्णायक कार्रवाई करेंगे।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में एंटी-नक्सल अभियान पहले से अधिक तेज कर दिया गया है और आने वाले समय में सारंडा को नक्सलमुक्त बनाने के ठोस परिणाम सामने आएंगे।
इलाके में 45–50 नक्सली सक्रिय
सीआरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में सारंडा क्षेत्र में लगभग 45 से 50 नक्सली सक्रिय हैं। हालांकि अब तक किसी भी नक्सली संगठन की ओर से आत्मसमर्पण की कोई पहल सामने नहीं आई है।
वरिष्ठ अधिकारियों की रणनीतिक बैठक
दौरे के दौरान सीआरपीएफ के आईजी साकेत कुमार, एसटीएफ आईजी अनूप बिरथरे, रांची डीआईजी सतीश लिंडा, सीआरपीएफ डीआईजी विनोद कार्तिक, कमांडेंट ओम जी शुक्ला तथा पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेनू सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने संयुक्त रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था और आगामी ऑपरेशनों की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।
हेलीपैड पर जवान बेहोश, सात को किया गया एयरलिफ्ट
दौरे के दौरान हेलीपैड पर उस समय अफरातफरी मच गई जब कोबरा 205 बटालियन के जवान अनिल बिस्वाल अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। बताया गया कि वे पहले से मलेरिया से पीड़ित थे। मौके पर मौजूद मेडिकल टीम ने तत्काल प्राथमिक उपचार दिया और उन्हें हेलीकॉप्टर से बेहतर इलाज के लिए भेजा गया।
सूत्रों के अनुसार, कुल सात बीमार जवानों को एयरलिफ्ट कर इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है और सभी की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
सारंडा की सुरक्षा चुनौतियां
गौरतलब है कि सारंडा क्षेत्र लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का गढ़ रहा है। घने जंगल और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां सुरक्षा बलों के लिए अभियान चलाने को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में लगातार चलाए गए अभियानों के कारण नक्सली गतिविधियों में कमी आई है और सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि जल्द ही यह क्षेत्र पूरी तरह नक्सलमुक्त हो सकेगा।

