ड्यूटी में सोना पड़ा भारी! CISF जवान को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत,सजा बरकरार
कोलकाता। Calcutta High Court ने ड्यूटी के दौरान सोते पाए गए एक Central Industrial Security Force (CISF) कांस्टेबल की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि संवेदनशील सुरक्षा ड्यूटी में लापरवाही किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।
न्यायमूर्ति Ajay Kumar Gupta की एकल पीठ ने कहा कि सशस्त्र ड्यूटी पर तैनात जवान से निरंतर सतर्कता और उच्च स्तर की जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है।
क्या था पूरा मामला?
याचिकाकर्ता CISF में सामान्य ड्यूटी कांस्टेबल के रूप में Indian Iron and Steel Company (IISCO) स्टील प्लांट, बर्नपुर में तैनात था।
- 26-27 अक्टूबर 2020 की रात करीब 12:55 बजे अचानक निरीक्षण के दौरान
- जवान को ड्यूटी पोस्ट पर कुर्सी पर बैठे हुए सोता पाया गया
- इसके बाद विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया
जवान की दलील
कांस्टेबल ने अपने जवाब में कहा:
- उसे बुखार और शरीर दर्द था
- डॉक्टर ने आराम की सलाह दी थी
- लेकिन मैनपावर की कमी के कारण उसने ड्यूटी जारी रखी
- लगातार 12 घंटे और फिर 8 घंटे की शिफ्ट करने से थकान हुई
- दवा लेने के कारण चक्कर आने से नींद लग गई
उसने दंडात्मक कार्रवाई न करने की अपील की।
विभागीय कार्रवाई
जांच के बाद अनुशासनिक प्राधिकारी ने इसे गंभीर लापरवाही और कर्तव्य में चूक माना और:
👉 दो दिन के वेतन के बराबर जुर्माना (Minor Penalty) लगाया।
जवान की अपील और पुनर्विचार याचिका भी उच्च अधिकारियों ने खारिज कर दी, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा:
- जवान स्वयं निरीक्षण के समय सोने की घटना स्वीकार कर चुका है
- बीमारी होने पर उसे पहले ही सक्षम अधिकारी को सूचित करना चाहिए था
- बिना सूचना ड्यूटी करना CISF कर्मी से अपेक्षित आचरण नहीं है
- संवेदनशील औद्योगिक सुरक्षा पोस्ट पर किसी भी प्रकार की लापरवाही प्लांट, संपत्ति और मानव जीवन के लिए खतरा बन सकती थी
अदालत ने माना कि दी गई सजा न तो अवैध है और न ही अत्यधिक।
कोर्ट का अंतिम फैसला
👉 कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि:
“संवेदनशील सुरक्षा ड्यूटी में सतर्कता सर्वोपरि है। ड्यूटी के दौरान सोना गंभीर अनुशासनहीनता है।”
इसी आधार पर कोर्ट ने CISF कांस्टेबल की याचिका खारिज कर दी और विभागीय सजा को बरकरार रखा।

