25 साल की कानूनी लड़ाई के बाद CRPF अधिकारी को मिली बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने बकाया वेतन, संशोधित पेंशन और 10 लाख रुपये देने का दिया आदेश
नई दिल्ली: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रकाश कुमार दीक्षित को 25 वर्षों से अधिक समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि उन्हें डिप्टी कमांडेंट पद पर पदोन्नति से जुड़े सभी परिणामी लाभ, पूरा बकाया वेतन, संशोधित पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं। इसके अलावा अदालत ने मुकदमे के खर्च के रूप में 10 लाख रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने अपने फैसले में अधिकारियों के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासनिक लापरवाही और फाइलों को केवल आगे बढ़ाने की कार्यशैली के कारण एक होनहार CRPF अधिकारी का करियर अनावश्यक रूप से प्रभावित हुआ।
क्या था पूरा मामला?
प्रकाश कुमार दीक्षित वर्ष 1986 में CRPF में सहायक कमांडेंट के रूप में नियुक्त हुए थे। वर्ष 1995 में विभागीय जांच के बाद उन पर बिना अनुमति कार्यभार सौंपने और स्वीकृत अवकाश के बिना 420 दिनों तक अनुपस्थित रहने का आरोप सिद्ध होने पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी बर्खास्तगी को रद्द करते हुए कहा कि मामले में केवल मामूली दंड दिया जाना चाहिए। इस निर्णय को वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मुख्य विवाद इस बात को लेकर था कि मामूली दंड की अवधि वर्ष 2018 से मानी जाए, जब दूसरा बर्खास्तगी आदेश जारी हुआ था, या फिर वर्ष 1995 से, जब पहली बार उन्हें सेवा से हटाया गया था।
पीठ ने स्पष्ट किया कि दंड की अवधि 10 जुलाई 1995 से प्रभावी मानी जाएगी और 10 जुलाई 1998 को समाप्त हो गई थी। इसलिए इस दंड को अधिकारी की वैध पदोन्नति के अधिकार से वंचित करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
डिप्टी कमांडेंट पद की पदोन्नति का मिलेगा लाभ
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रकाश कुमार दीक्षित को उनके बैच के अन्य अधिकारियों के साथ जिस तिथि से डिप्टी कमांडेंट के पद पर पदोन्नति मिली थी, उसी तिथि से पदोन्नति का लाभ दिया जाए।
अदालत ने कहा कि 14 मार्च 2023 को हुई रिव्यू विभागीय पदोन्नति समिति (Review DPC) की सिफारिश के अनुसार उन्हें पात्रता की तिथि से पूरा बकाया वेतन और सभी सेवा संबंधी लाभ प्रदान किए जाएं।
वेतन, पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ होंगे संशोधित
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि अधिकारी के वेतन, वार्षिक वेतनवृद्धि, पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का पुनर्निर्धारण किया जाए तथा सभी बकाया राशि का भुगतान किया जाए।
हालांकि अदालत ने उन्हें महानिरीक्षक (IG) पद पर पदोन्नति देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि वह उस पद के लिए निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते थे।
10 लाख रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में भी देने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह प्रकाश कुमार दीक्षित को 25 वर्षों से अधिक समय तक चले मुकदमे के खर्च के रूप में 10 लाख रुपये का भुगतान दो महीने के भीतर करे। यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं किया गया तो इस राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि बकाया राशि के भुगतान, संशोधित आदेश जारी करने और अन्य सभी औपचारिकताएं छह महीने के भीतर पूरी की जाएं।

