कलकत्ता हाईकोर्ट: मेडिकल कैटेगरी के आधार पर BSF अधिकारी की DIG पद पर पदोन्नति रोकना गलत, 8 हफ्ते में रिव्यू DPC बुलाने का आदेश
कोलकाता
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) किसी अधिकारी की पदोन्नति को सिर्फ मेडिकल कैटेगरी के आधार पर नहीं रोक सकता, खासकर जब उसी मेडिकल स्थिति में अधिकारी को पहले तीन बार पदोन्नति मिल चुकी हो।
न्यायमूर्ति रीतोब्रोतो कुमार मित्रा की एकल पीठ ने BSF को 8 हफ्ते के भीतर रिव्यू डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (DPC) बुलाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि DPC याचिकाकर्ता की पदोन्नति पर लागू नियमों के तहत छूट देते हुए फिर से विचार करे। अगर अधिकारी योग्य पाया जाता है तो पदोन्नति 29 दिसंबर 2023 से प्रभावी मानी जाएगी। साथ ही उसे नॉशनल सीनियोरिटी और वेतन निर्धारण का लाभ भी मिलेगा। हालांकि वास्तविक वेतन उसे पदभार ग्रहण करने की तारीख से मिलेगा।
कोर्ट ने टिप्पणी की, “याचिकाकर्ता का करियर बेदाग रहा है। अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि वही मेडिकल स्थिति, जिसे पहले की पदोन्नतियों में नजरअंदाज किया गया था, अचानक DIG पद के लिए अयोग्यता कैसे बन गई।”
क्या है पूरा मामला
याचिकाकर्ता अमरदीप सिंह जोहल 1993 में BSF में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर भर्ती हुए थे। 1995 में छुट्टी से जम्मू में ड्यूटी पर लौटते समय उनकी एक गंभीर सड़क दुर्घटना हो गई थी। इसके बाद उनकी मेडिकल कैटेगरी S1 H1 A2 (L) P1 E1 में डाउनग्रेड कर दी गई थी।
इसके बावजूद उन्होंने जम्मू-कश्मीर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों सहित कठिन इलाकों में सेवा दी। उन्हें डिप्टी कमांडेंट, सेकंड-इन-कमांड और कमांडेंट के पदों पर लगातार पदोन्नति भी मिली।
लेकिन जब DIG पद के लिए उनकी फाइल DPC के पास गई तो कमेटी ने SHAPE-I मेडिकल कैटेगरी न होने के कारण पदोन्नति टाल दी। BSF ने उनके लिए एक पद खाली रखा, लेकिन पदोन्नति रोकने का कोई कारण नहीं बताया।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं
अमरदीप सिंह की ओर से कहा गया कि 30 साल से उनकी मेडिकल स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया और इसी स्थिति में वे कमांड की जिम्मेदारी निभाते रहे। दुर्घटना को “बोना फाइड सरकारी ड्यूटी” के दौरान हुई माना गया था, इसलिए उन्हें मेडिकल नियमों के तहत छूट मिलनी चाहिए। इस संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट के वेंकटेश बनाम भारत संघ और जगमोहन चौधरी बनाम भारत संघ के फैसलों का हवाला दिया गया।
केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि दुर्घटना छुट्टी से लौटते समय हुई थी, इसलिए यह “एक्टिव सरकारी ड्यूटी” नहीं थी। इसलिए क्लॉज 4.14(b) के तहत छूट नहीं मिल सकती। सरकार ने यह भी कहा कि पिछली पदोन्नतियां बाद की DPC पर बाध्यकारी नहीं हैं।
कोर्ट ने क्या कहा
कोर्ट ने BSF के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि 1995 से अधिकारी की मेडिकल स्थिति वही है और इसने अब तक उनके काम या पदोन्नति में बाधा नहीं डाली। उन्होंने सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में बिना किसी नकारात्मक टिप्पणी के सेवा दी है।
कोर्ट ने कहा, “यह मानना सुरक्षित है कि याचिकाकर्ता मेडिकल रूप से उन सभी क्षेत्रों में फोर्स का नेतृत्व करने में सक्षम है जहां उन्हें तैनात किया गया है।”
पीठ ने यह भी कहा कि DPC के रिकॉर्ड में यह कहीं नहीं बताया गया कि DIG पद के लिए कमांडेंट से अलग कोई अतिरिक्त मेडिकल आवश्यकता है। कोर्ट ने DPC की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कमेटी ने बिना कोई कारण बताए सिर्फ पदोन्नति टाल दी।
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसलों का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि भले ही इसे “एक्टिव ड्यूटी” न माना जाए, लेकिन “बोना फाइड सरकारी ड्यूटी” के तहत छूट देने से इनकार करने का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया।
अंत में कोर्ट ने 33 साल की बेदाग सेवा का हवाला देते हुए BSF को निर्देश दिया कि वह रेगुलेशन 4.14(b) के तहत उचित छूट देते हुए अमरदीप सिंह के मामले पर फिर से विचार करे।
केस: अमरदीप सिंह जोहल बनाम भारत संघ एवं अन्य, WPA 14474 of 2025

