पश्चिम बंगाल मतदान के बाद मणिपुर लौटेंगे 8,500 CAPF जवान, सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ड्यूटी के लिए मणिपुर से भेजे गए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवान अब 29 अप्रैल को मतदान समाप्त होने के बाद वापस मणिपुर लौटेंगे। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों के अनुसार, चुनावी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए हाल के हफ्तों में मणिपुर में तैनात केंद्रीय बलों के लगभग 30 प्रतिशत जवानों को अस्थायी रूप से पश्चिम बंगाल भेजा गया था। यह कदम चुनावों को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा था।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि करीब 85 कंपनियां, यानी लगभग 8,500 CAPF कर्मियों को चुनाव ड्यूटी के लिए मणिपुर से हटाया गया था। जवानों की वापसी 29 अप्रैल से चरणबद्ध तरीके से शुरू होगी। मणिपुर में पहले से 275 से अधिक CAPF कंपनियां तैनात थीं।
अधिकारियों का कहना है कि यह वापसी ऐसे समय में हो रही है जब मणिपुर के कई जिलों में हिंसा और तनाव की घटनाएं फिर बढ़ी हैं। केंद्रीय बलों की वापसी से जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और स्थानीय पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।
एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य की स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। केंद्रीय बलों की मौजूदगी से ऑपरेशन क्षमता बढ़ेगी और आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा मजबूत होगा।
पिछले कुछ सप्ताहों में राज्य में कई हिंसक घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें आम नागरिकों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाया गया। कुछ घटनाओं में बच्चों और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान भी प्रभावित हुए, जिससे हालात की गंभीरता साफ दिखाई देती है।
ताजा तनाव में राज्य के तीन प्रमुख समुदाय—मैतेई, कुकी-जो और नागा—भी शामिल हो गए हैं, जिसके कारण विरोध प्रदर्शन, झड़पें और सुरक्षा बलों के साथ टकराव की घटनाएं बढ़ी हैं। पहले संघर्ष मुख्य रूप से इंफाल घाटी के मैतेई और पहाड़ी इलाकों के कुकी-जो समुदाय तक सीमित था।
सुरक्षा अधिकारियों ने माना कि केंद्रीय बलों की अस्थायी कमी से संवेदनशील इलाकों में चुनौतियां बढ़ी थीं, हालांकि राज्य पुलिस और शेष केंद्रीय बल लगातार सुरक्षा अभियान चलाते रहे।
अब पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के साथ ही सरकार का ध्यान फिर मणिपुर की स्थिति पर केंद्रित हो गया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि CAPF जवानों की वापसी से राज्य में शांति बहाल करने और हिंसा पर नियंत्रण पाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

